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Anant Chaturdashi 2023: अनंत चतुर्दशी आज, जानें गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और नियम

Thu, 28 Sep 2023 10:11 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Anant Chaturdashi 2023 - फोटो : amar ujala
Anant Chaturdashi 2023: अनंत चतुर्दशी व्रत का सनातन धर्म में बड़ा महत्व है। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनंत भगवान यानी भगवान विष्णु की पूजा के पश्चात बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। ये कपास या रेशम से बने होते हैं और इनमें चौदह गांठे होती हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन में श्री गणेश विसर्जन भी किया जाता है इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत के कई राज्यों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी का पूजा मुहूर्त, गणपति विसर्जन का विसर्जन, महत्व और अन्य सभी जानकारियां विस्तार से...

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अनंत चतुर्दशी तिथि
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि आरम्भ:  28 सितम्बर, 2023 प्रातः 06:12 से  
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि समाप्त:28 सितम्बर, 2023 सायं 18:51 तक
कुल अवधि: 12 घंटे 39 मिनट

अनंत चतुर्दशी 2023 पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर 07 बजकर 40 मिनट तक रहेगा,वहीं शाम के समय का गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त 04 बजकर 41 मिनट से रात 09 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।

शुभ समय चौघड़िया 
शुभ - शुभ- 06:12 से 07:42 तक
चर - अच्छा- 10:42 से 12:11 तक
लाभ - शुभ-  12:11 से 13:30 तक
शुभ - शुभ- 16:41 से 18:11 तक

राहु काल (अशुभ समय):    दोपहर 01:30 से 03:20 तक

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Anant Chaturdashi 2023 - फोटो : lord vishnu
अनंत चतुर्दशी का महत्व 
पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई थी। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों तल,अतल,वितल,सुतल,तलातल,रसातल,पाताल,भू,भुवः,स्वः,जन,तप,सत्य,मह की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने हेतु  श्री हरि विष्णु अनंत के रूप में स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए कहते हैं जो भी अनंत चतुर्दशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु को प्रसन्न करता है तो वे उन्हें इसका अनंत फल देते हैं। कहते हैं अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है तो उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।

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Anant Chaturdashi 2023
अनंत चतुर्दशी से जुड़े नियम 
  • यह व्रत भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इसके लिए चतुर्दशी तिथि सूर्य उदय के पश्चात दो मुहूर्त में व्याप्त होनी चाहिए।
  • यदि चतुर्दशी तिथि सूर्य उदय के बाद दो मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो जाए तो अनंत चतुर्दशी पिछले दिन मनाए जाने का विधान है।
  • इस व्रत की पूजा और मुख्य कर्मकाल दिन के प्रथम भाग में करना शुभ माने जाते हैं।
  • यदि प्रथम भाग में पूजा करने से चूक जाते हैं, तो मध्याह्न के शुरुआती चरण में करना चाहिए। मध्याह्न का शुरुआती चरण दिन के सप्तम से नवम मुहूर्त तक होता है।
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भगवान विष्णु
चतुर्दशी पूजा विधि 
अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन प्राप्त होता है। चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा अर्चना करने का विधान है। अनंत चतुर्दशी की पूजा दोपहर के समय की जाती है। अनंत चतुर्दशी व्रत की पूजन विधि इस प्रकार है-  
  • चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर कलश स्थापना करें। 
  • कलश पर कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करें अगर आप चाहें तो श्री हरि विष्णु की तस्वीर भी लगा सकते हैं।
  • अब एक धागे को कुमकुम,केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र तैयार करें। ध्यान रहे इस सूत्र में चौदह गांठें लगी होनी चाहिए। 
  • अब इस सूत्र को भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष रखें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा शुरू करें।   
  • इस मंत्र का जाप करें-"अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।"
  • पूजन समाप्त होने के पश्चात अनंत सूत्र को पूजा स्थल से उठाकर अपनी बांह में बांध लें।
  • ध्यान रखें कि पुरुष अनंत सूत्र को दाहिने हाथ में और महिलाएं बांये हाथ में बांध सकती हैं। 
  • पूजन समाप्ति के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें।
 
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Anant Chaturdashi 2023
अनंत चतुर्दशी की कथा 
अनंत चतुर्दशी सम्बन्धित कथा महाभारत काल से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार कौरवों ने छल से जुए में पांडवों को हरा दिया था। इसके बाद पांडवों को अपना राजपाट त्याग कर वनवास जाना पड़ा। इस दौरान पांडवों ने बहुत कष्ट उठाए। ऐसे में एक दिन श्री कृष्ण पांडवों से मिलने वन पहुंचे। तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि, हे प्रभु हमें इस पीड़ा से निकलने का और दोबारा राजपाट प्राप्त करने का मार्ग दिखाएं। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर की बात सुनकर पांचों पांडवों और द्रौपदी सभी को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी। और साथ ही भगवान अनंत की पूजा करने के लिए कहा।

युधिष्ठिर ने अनंत भगवान के बारे में पूछा तो श्री कृष्ण ने बताया कि भगवान अनंत श्री हरि विष्णु के ही रूप हैं। चातुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर अनंत शयन में रहते हैं। इतना ही नहीं अनंत भगवान ने ही वामन अवतार में दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था। इसीलिए इनके पूजन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। श्री कृष्ण की बात सुनकर युधिष्ठिर ने परिवार समेत इस व्रत को धारण किया जिसके शुभ फलस्वरूप उन्हें पुन: हस्तिनापुर का राजपाट मिला।
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