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Diwali Puja Samagri: आने वाला है धनतेरस, दिवाली और भाई दूज, पूजा के लिए मंगा लें ये खास चीजें

Wed, 16 Oct 2024 10:56 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Diwali Puja Samagri - फोटो : अमर उजाला
Diwali Puja Samagri: दिवाली हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भारत सहित अन्य देशों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। हर घर में इसकी तैयारी लगभग महीने भर पहले शुरू हो जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी घरों में भम्रण करती हैं। इसलिए साफ-सफाई और पूजा पाठ का खास ध्यान रखा जाता है। 

पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस साल 31 अक्तूबर या 1 नवंबर 2024 को दिवाली मनाई जाएगी। यह पांच दिन का दीपोत्सव होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज के दिन किया जाता है। इस दौरान हर दिन के त्योहार के हिसाब से अलग-अलग पूजन सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती हैं। ऐसे में आप दिवाली आने से पहले ही पूजन की सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें। आइए इसके बारे में जानते हैं।
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Diwali Puja Samagri - फोटो : adobe
दिवाली पूजा सामग्री की लिस्ट 
  • धन्वंतरि या कुबेर जी की प्रतिमा
  • गोवर्धन पूजा के लिए गाय का गोबर
  • रंगोली के लिए रंग
  • भगवान गणेश और लक्ष्मी माता की तस्वीर या मूर्ति
  • रूई की बत्ती
  • दीए जलाने के लिए तेल या घी
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Diwali Puja Samagri - फोटो : adobe
  • रोली
  • चावल
  • हल्दी
  • चौक बनाने के लिए आटा 
  • भाई दूज के लिए गोला
  • दीपावली की सजावट का सारा सामान
  • प्रसाद के लिए मिठाई मंगा लें

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Diwali Puja Samagri - फोटो : adobe stock
  • फूल और पान
  • चांदी का सिक्का
  • सभी भगवानों के श्रृंगार का सामान
  • मिट्टी के छोटे दीए
  • शुभ-लाभ 
  • कपड़े
  • गिफ्ट
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Diwali Puja Samagri - फोटो : adobe stock
  • बंधनवार 
  • तोरण
  • फूलों की लड़ियां 
  • ताजे फूल
  • लाइट्स
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Diwali Puja Samagri - फोटो : Amar Ujala
  • भगवान के वस्त्र 
  • साबुत नारियल 
  • अगरबत्ती
  • पीतल का दीपक 
  • कलावा
  • साबुत गेहूं के दाने
  • आरती की किताब। यदि किताब न मिलें, और आप यहां से आरती पढ़ सकती हैं।
मां लक्ष्मी की आरती 

ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। 
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। 
मैया सुख संपत्ति दाता। 
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। 
मैया तुम ही शुभदाता। 
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। 
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। 
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। 
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता। 
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

ऊं  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

भगवान गणेश की आरती  

जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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