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देवशयनी एकादशी 2020: चार महीनों के लिए सभी तरह के शुभ कार्यों में लग जाएगा विराम

Mon, 29 Jun 2020 07:15 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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देवशयनी एकादशी 2020: चार महीनों में सभी तरह के शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। - फोटो : अमर उजाला
1 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इसी एकादशी के साथ चातुर्मास का महीना भी आरंभ हो जाएगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इन चार महीनों में सभी तरह के शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु जोकि इस सृष्टि के पालनकर्ता हैं शयन करने के लिए पाताल लोक में क्षीर सागर के अंदर चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे- हरिशयनी एकादशी, शयनी एकादशी, पद्मा एकादशी, पद्मनाभा एकादशी आदि।



 
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lord vishnu mystery - फोटो : Social Media
आषाढ़ महीने की एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं तब सृष्टि की जिम्मेदारी भगवान शंकर के हाथों में आ जाती है। इस चार महीने की समयावधि को ही चातुर्मास कहते हैं।
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भगवान विष्णु - फोटो : अमर उजाला।
चार महीने के बाद देवोत्थानी एकादशी पर भगवान विष्णु अपनी निद्रा से जागकर पुन: सृष्टि का संचालन करने के लिए पाताल लोक से विष्णु लोक में पधारते हैं। इसी के साथ चार महीनों तक शुभ कार्यों और विवाह में लगी पाबंदियां हट जाती है और शुभ कार्य एक बार फिर से आरंभ हो जाता है।

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vishnu
ऐसा माना जाता है कि जब भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं तब पृथ्वी पर सबसे ज्यादा नकारात्मक शक्तियां हावी हो जाती हैं इसलिए इस दौरान चार महीनों तक धार्मिक कार्य, पूजा, हवन और जाप किया जाता है।
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देवशयनी एकादशी व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ही महत्व होती है। खास तौर पर जब आषाढ़ महीने की देवशयनी एकादशी आती है। माना जाता है जो भी इस एकादशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु का नाम जपता है उसके सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं और हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
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भगवान विष्णु की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति - फोटो : Social media
पूजन विधि
देवशयनी एकादशी को श्री हरि का शयनकाल शुरू होने के कारण उनकी विशेष विधि-विधान से पूजा की जाती है। पदम् पुराण के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन कमललोचन भगवान विष्णु का कमल के फूलों से पूजन करने से तीनों लोकों के देवताओं का पूजन हो जाता है। इस दिन उपवास करके भगवान विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाकर पीत वस्त्रों व पीले दुपट्टे से सजाकर श्री हरि कीआरती उतारनी चाहिए। भगवान को पान-सुपारी अर्पित करने के  बाद मंत्र के द्वारा स्तुति करें।
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