हिमाचल में हड़ताल से हजारों उद्योगों में काम ठप, चक्का जाम, तस्वीरें
Sat, 03 Sep 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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केंद्र के खिलाफ हिमाचल में ट्रेड यूनियनों ने बड़ी हड़ताल की। कामगारों के प्रदर्शन से यहां 5 हजार उद्योग बंद रहे, जगह-जगह चक्का जाम और बंद के कारण राज्य को भारी चपत लगी है।
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र के खिलाफ हिमाचल में ट्रेड यूनियनों ने बड़ी हड़ताल की। कामगारों के प्रदर्शन से यहां 5 हजार उद्योग बंद रहे, जगह-जगह चक्का जाम और बंद के कारण राज्य को भारी चपत लगी है।
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केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर एटक, इंटक और सीटू की संयुक्त हड़ताल का औद्योगिक जिला सोलन में मिलाजुला असर रहा। अधिकांश 5000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों में कामकाज लगभग ठप रहा। अनुमान के मुताबिक 100 करोड़ से अधिक का उत्पादन नहीं हुआ। परवाणू में उद्यमियों ने खतरे और तोड़फोड़ की आशंका को देखते हुए रविवार के बजाय शुक्रवार को ही कर्मचारियों को विकली ऑफ दे दिया।
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर एटक, इंटक और सीटू की संयुक्त हड़ताल का औद्योगिक जिला सोलन में मिलाजुला असर रहा। अधिकांश 5000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों में कामकाज लगभग ठप रहा। अनुमान के मुताबिक 100 करोड़ से अधिक का उत्पादन नहीं हुआ। परवाणू में उद्यमियों ने खतरे और तोड़फोड़ की आशंका को देखते हुए रविवार के बजाय शुक्रवार को ही कर्मचारियों को विकली ऑफ दे दिया।
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केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ हिमाचल के विभिन्न शहरों में शुक्रवार को ट्रेड यूनियनों ने हल्ला बोला। ब्लॉक, जिला स्तर तक धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम किए गए। शिमला में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सचिवालय घेराव को जा रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेट्स लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेट्स हटाने का प्रयास किया। इसको लेकर झड़प हो गई। छोटा शिमला में करीब आधा घंटा चक्का जाम किया। शहरवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल के विभिन्न शहरों में शुक्रवार को ट्रेड यूनियनों ने हल्ला बोला। ब्लॉक, जिला स्तर तक धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम किए गए। शिमला में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सचिवालय घेराव को जा रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेट्स लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेट्स हटाने का प्रयास किया। इसको लेकर झड़प हो गई। छोटा शिमला में करीब आधा घंटा चक्का जाम किया। शहरवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर शिमला सहित पूरे प्रदेश में मजदूरों और कर्मचारियों की हड़ताल रही। सीटू राज्य सचिव एवं संयुक्त मंच के शिमला जिला संयोजक विजेंद्र मेहरा ने दावा किया है कि प्रदेश के उद्योगों, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, होटलों, स्कूलों, निर्माण क्षेत्र, बीमा, बैंकों, बीएसएनएल, पोस्टल सर्विसेज, एसजेवीएनएल, अस्पतालों, बिजली परियोजनाओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, रेहड़ी-फड़ी, रेलवे कुलियों, सीएंडसी ने हड़ताल की।
- फोटो : अमर उजाला
शिमला सहित पूरे प्रदेश में मजदूरों और कर्मचारियों की हड़ताल रही। सीटू राज्य सचिव एवं संयुक्त मंच के शिमला जिला संयोजक विजेंद्र मेहरा ने दावा किया है कि प्रदेश के उद्योगों, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, होटलों, स्कूलों, निर्माण क्षेत्र, बीमा, बैंकों, बीएसएनएल, पोस्टल सर्विसेज, एसजेवीएनएल, अस्पतालों, बिजली परियोजनाओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, रेहड़ी-फड़ी, रेलवे कुलियों, सीएंडसी ने हड़ताल की।
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राजधानी में होटलों व रेस्तरां में काम करने वाले मजदूर हड़ताल पर रहे। मजदूरों के काम पर न आने के कारण होटलों व रेस्तरां में ताले लटके रहे। जिसके चलते काम काफी प्रभावित हुआ। लोग शहरों में खाना खाने के लिए इधर उधर भटकते नजर आए। देर शाम तक यही सिलसिला जारी रहा।
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हड़ताल का असर आईजीएमसी में भी देखने को मिला। हड़ताल में सफाई और सुरक्षा कर्मी भी शामिल हुए। ऐसे में जहां अस्पताल में सफाई व्यवस्था चरमरा गई, वहीं अस्पताल प्रशासन ने सफाई कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से शुक्रवार को लगभग ढाई दर्जन ऑपरेशन टालने पड़े। इससे मरीज परेशान होते रहे। कई मरीज ऑपरेशन की तिथि मिलने के बाद अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां आकर उन्हें मायूस होना पड़ा।
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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आहवान पर सिरमौर जिले में भी ट्रेड यूनियनें हड़ताल पर रही। जिले के नाहन, पांवटा साहिब, शिलाई, संगड़ाह, ददाहू और सराहां में विभिन्न यूनियनों से जुड़े लोग सड़क पर उतर गए। सरकार के खिलाफ नारेजाबी करते हुए जोरदार रैलियां निकाली गई। नाहन शहर में विभिन्न यूनियनों ने रैली निकालकर विरोध जताया।
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सिरमौर जिले में भी ट्रेड यूनियनें हड़ताल पर रही। जिले के नाहन, पांवटा साहिब, शिलाई, संगड़ाह, ददाहू और सराहां में विभिन्न यूनियनों से जुड़े लोग सड़क पर उतर गए। सरकार के खिलाफ नारेजाबी करते हुए जोरदार रैलियां निकाली गई। नाहन शहर में विभिन्न यूनियनों ने रैली निकालकर विरोध जताया।
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हड़ताल के समर्थन में राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने शुक्रवार को बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस में गेट मीटिंग कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में लाया जा रहा बिजली संशोधन बिल 2014 कर्मचारी और उपभोक्ता विरोधी है।
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केंद्रीय मजदूर संगठनों के आह्वान पर शुक्रवार को मंडी में विभिन्न संगठनों ने धरना प्रदर्शन और हड़ताल की। जिसका नेतृत्व सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह, एटक के प्रधान प्रकाश पंत, इंटक के प्रधान वाईपी कपूर ने किया। हड़ताल में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव संघ के बटकराज, बीमा कर्मी, बीएसएनएल, बीबीएमबी, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, जलरक्षक, रेहड़ी-फड़ी, निर्माण मजदूर यूनियनों से जुड़े सैकड़ों मजदूरों ने सेरी मंच से चौहाटा बाजार तक रैली निकाली।
- फोटो : अमर उजाला
मंडी में विभिन्न संगठनों ने धरना प्रदर्शन और हड़ताल की। जिसका नेतृत्व सीटू के जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह, एटक के प्रधान प्रकाश पंत, इंटक के प्रधान वाईपी कपूर ने किया। हड़ताल में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव संघ के बटकराज, बीमा कर्मी, बीएसएनएल, बीबीएमबी, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, जलरक्षक, रेहड़ी-फड़ी, निर्माण मजदूर यूनियनों से जुड़े सैकड़ों मजदूरों ने सेरी मंच से चौहाटा बाजार तक रैली निकाली।
मुख्य मांगें - मजदूर विरोधी नीतियों को बंद किया जाए। श्रम कानूनों का पालन हो। - न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये से कम नहीं होना चाहिए। - बीमा, बैंक, बीएसएनएल और पोस्टल सर्विसेज का निजीकरण नहीं होना चाहिए। - आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर्स को नियमित किया जाए। - ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगानी चाहिए। आउटसोर्सिंग की नीति मंजूर नहीं। - सभी मजदूरों को पेंशन और मेडिकल सुविधा देनी होगी।
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मुख्य मांगें
- मजदूर विरोधी नीतियों को बंद किया जाए। श्रम कानूनों का पालन हो।
- न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये से कम नहीं होना चाहिए।
- बीमा, बैंक, बीएसएनएल और पोस्टल सर्विसेज का निजीकरण नहीं होना चाहिए।
- आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर्स को नियमित किया जाए।
- ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगानी चाहिए। आउटसोर्सिंग की नीति मंजूर नहीं।
- सभी मजदूरों को पेंशन और मेडिकल सुविधा देनी होगी।