फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की ये है सच्चाई

Tue, 06 Jun 2017 12:44 PM IST
संजय भारद्वाज/हितेश शर्मा/अमर उजाला, पानिया मंदोली (सिरमौर)
विज्ञापन
1 of 7
शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की सच्चाई कुछ और ही है जो यह तस्वीरें बयां कर रही हैं। टीन के ड्रम पर ब्लैक बोर्ड और स्टोर के एक कोने में पड़े तख्तों पर बच्चों के मिड-डे मील की थालियां। टीन की चादरों की छत वाला शेड ऐसा कि प्रचंड गर्मी में तपकर भीतर बैठा कोई भी झुलस जाए। ऐसे वातावरण में क्या कोई पांच से छह घंटे तक रह सकता है? यह हाल हिमाचल के जिला सिरमौर के प्राइमरी स्कूल पानिया मंदोली का है।
विज्ञापन

2 of 7
स्कूल को एक ग्रामीण ने एक बीघा उपजाऊ भूमि दान दी है, लेकिन तीन साल बाद भी भवन नहीं बना। मजबूरन, एक ग्रामीण के टीन के शेड में स्कूल चल रहा है। ग्रामीण इस शेड को स्टोर के लिए इस्तेमाल करता था। मई 2014 में स्कूल खुला था। तीन साल बाद भी भवन निर्माण को फंडिंग नहीं हुई। जिला सिरमौर के धारटीधार इलाके की सत्तर भादो पंचायत के पानिया मंदोली में चल रहा यह स्कूल अब तक गांव के दो अलग-अलग कमरों में शिफ्ट हो चुका है। वर्तमान में यह घर के एक टीन के शेड में चलाया जा रहा है। टीन की छत से बरप रही प्रचंड गर्मी से बच्चों के साथ शिक्षक भी बेहाल हैं।
विज्ञापन

3 of 7
शेड के आधे हिस्से में लकड़ी के फट्टे हैं। आधा हिस्सा स्कूल स्टाफ और बच्चों के बैठने के लिए है। 14 फुट लंबे 8 फुट चौड़ाई वाले इस स्टोर में पढ़ाई के लिए माहौल बनाना मुश्किल है। उधर, शिक्षा उपनिदेशक एलीमेंटरी पूनम सूद ने बताया कि स्कूल भवन के निर्माण को 11 जुलाई, 2016 को 10,43,500 रुपये का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा गया था। बजट को स्वीकृति मिलते ही स्कूल भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

4 of 7
पानिया के सुरेंद्र कुमार ने स्कूल भवन को 2014 में एक बीघा उपजाऊ खेत दान किए थे। उनका कहना है कि तीन साल बाद भी भवन के लिए विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यदि इस जमीन पर वे फसल उगाते तो परिवार का अच्छे ढंग से गुजारा चला सकते थे। अब उनकी जमीन बंजर हो गई है। वर्ष 2014 में उन्होंने विभाग को रजिस्ट्री तैयार कर भूमि सौंप दी थी। स्कूल भवन के अलावा ग्राउंड, किचन शेड और टॉयलेट के लिए उन्होंने 5 उपजाऊ खेत दान किए हैं। सुरेंद्र कुमार का कोई भी बच्चा इस स्कूल में नहीं पढ़ता है।
विज्ञापन

5 of 7
1.20 लाख रुपये से स्कूल की जमीन पर रसोईघर और 75 हजार से टॉयलेट बना है। हालांकि, अभी इसमें काफी काम होना है, लेकिन भवन के लिए बजट नहीं आया है। मंदोली के एक ग्रामीण मदन सिंह के घर में स्कूल चल रहा है।
विज्ञापन

6 of 7
उन्होंने घर का एक टीन का शेड स्कूल को दिया है। पहले यह स्कूल प्रेम सिंह के घर पर चलता था। करीब दो साल तक यहां कक्षाएं बैठीं। इसके बाद इसे स्थानांतरित कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
एसएमसी अध्यक्ष ईश्वर सिंह, पूर्व एसएमसी प्रधान हरदयाल सिंह, मान सिंह, पदमा देवी और काकी देवी ने बताया कि स्कूल भवन बनने की आस अब धराशायी होने लगी है। वे शिक्षा विभाग को पत्राचार करने के साथ-साथ नेताओं से भी कई बार मिल चुके हैं। पुनर्सीमांकन के बाद नाहन विधानसभा से रेणुका विस में जाने से अब यह गांव अंतिम छोर पर आ चुका है। लिहाजा, चीड़ के घने जंगल के बीच बसे इस गांव के विकास की तरफ किसी का भी ध्यान नहीं है। गांव में पानी की किल्लत से भी लोग परेशान हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें