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सवर्ण आयोग की मांग पर हिमाचल में बवाल: उग्र प्रदर्शनकारियों ने तोड़े कई वाहन, पथराव में एएसपी समेत नौ घायल

Wed, 16 Mar 2022 11:23 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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शिमला में सवर्ण मोर्चा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
सवर्ण आयोग एक्ट के गठन की मांग को लेकर बुधवार को हिमाचल प्रदेश में दिनभर बवाल मचा रहा। डंडे-लाठियां लेकर पहुंचे देवभूमि क्षत्रिय संगठन और देवभूमि सवर्ण संगठन के हजारों प्रदर्शनकारियों ने राजधानी शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर समेत अन्य जिलों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस व कई अन्य वाहनों पर पथराव किया। पुलिस से झड़प के दौरान एक एएसपी समेत नौ पुलिस कर्मी घायल हो गए। सरकारी तामझाम ध्वस्त हो गया। धारा 144 लागू होने के बावजूद राजधानी शिमला में प्रदर्शन के दौरान पांच घंटे अराजकता जैसा  माहौल रहा। 

दोपहर बाद शिमला में प्रदर्शन के दौरान देवभूमि क्षत्रिय संगठन के अध्यक्ष रुमित ठाकुर ने देवभूमि पार्टी बनाने और विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान कर दिया, जिससे संगठन दोफाड़ हो गया। आंदोलनकारी आपस में ही उलझ गए। आंदोलनकारियों का एक बड़ा वर्ग अध्यक्ष रुमित ठाकुर के खिलाफ विरोध में नारे लगाने के बाद प्रदर्शन स्थल से लौट गया। पुलिस अधीक्षक शिमला मोनिका भुटूंगरू ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ थाना बालूगंज में हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। 
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शिमला में सवर्ण मोर्चा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
सिरमौर के ददाहू में भी 120 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इसके अलावा बिलासपुर में 19 घंटे तक देवभूमि क्षत्रिय संगठन का महासचिव योगेश ठाकुर हिरासत में रखा गया। तीन अन्य सदस्य भी पुलिस ने गिरफ्तार किए। इससे पहले सिरमौर से शिमला रैली में जा रहे देवभूमि क्षत्रिय संगठन के कार्यकर्ताओं और पुलिस की मंगलवार रात को दो सड़का के समीप भी झड़प हुई। 
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शिमला में सवर्ण मोर्चा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
नाहन, शोघी और तारादेवी में भी प्रदर्शनकारी पुलिस से उलझे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के  पथराव में पांच पुलिस कर्मी घायल हो गए। मेडिकल कॉलेज नाहन में उपचार के बाद उन्हें घर भेजा दिया। इसके बाद बुधवार सुबह प्रदेश भर से प्रदर्शनकारी राजधानी शिमला पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने खुफिया एजेंसियों और पुलिस की सारी रणनीति को फेल कर दिया। 

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प्रदर्शनकारियों ने सीएम का होर्डिंग फाड़ा। - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने शिमला में टूटीकंडी क्रॉसिंग पर रोक दिया। यहां उग्र भीड़ ने क्रॉसिंग के पास लगे मुख्यमंत्री के होर्डिंग फाड़ दिए, बैरिकेड तोड़ दिए। मंडी, चंडीगढ़ और बिलासपुर की ओर दोपहर तक राजधानी से वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। विद्यार्थी स्कूल नहीं पहुंच पाए, मरीज अस्पतालों में नहीं पहुंचे। 
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प्रदेशाध्यक्ष रुमित ठाकुर व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
जरूरी कामकाज के लिए निकले लोग परेशान हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को तीन घंटे का समय देते हुए चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तय समय में मुख्यमंत्री नहीं आए तो वे शहर के भीतर कूच करेंगे। इसी बीच देवभूमि क्षत्रिय संगठन के अध्यक्ष ने रुमित ठाकुर ने जब देवभूमि पार्टी बनाने और विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कह दी, जिससे प्रदर्शनकारी दोफाड़ हो गए और रुमित के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। रुमित की बात से नाराज होकर प्रदर्शनकारी वहां से जाने लगे और प्रदर्शन खत्म हो गया। 
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घायल पुलिस अफसर और कर्मचारी से मिले सीएम जयराम। - फोटो : अमर उजाला
घायल पुलिसकर्मियों का हाल जानने आईजीएमसी पहुंचे सीएम
शाम साढ़े छह बजे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर घायल पुलिस अफसर और कर्मचारी को देखने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (आईजीएमसी) पहुंचे। यहां एएसपी सुशील कुमार शर्मा और एक कांस्टेबल आईजीएमसी के आपातकाल वार्ड में दाखिल हैं। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज, नाचन के विधायक विनोद कुमार भी सीएम के साथ थे।
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पुलिस की गाड़ी पर पथराव। - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी तैनात रहे पुलिस कर्मी
राजधानी शिमला में टूटीकंडी क्रॉसिंग के पास हुए सवर्ण समाज के लोगों के प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास ओकओवर के बाहर कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए थे। मुख्यमंत्री आवास के दोनों गेट के आगे पांच से छह पुलिस कर्मी तैनात रहे। पुलिस की एक बस भी राजभवन को जाने वाली सड़क पर खड़ी रही।

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सवर्ण मोर्चा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
इस बस में बटालियन के पुलिस कर्मी बैठे थे। मुख्यमंत्री आवास के आसपास किसी भी राहगीर को खड़े नहीं होने दिया गया। उधर, राज्य सचिवालय में भी बुधवार को प्रवेश के दौरान सख्ती रही। काफी संख्या में यहां भी पुलिस कर्मी तैनात रहे। सचिवालय के सुरक्षा कर्मियों ने प्रवेश करने वालों की पूरी पड़ताल करने के बाद अंदर जाने दिया
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प्रदर्शनी में रुमित ठाकुर व अन्य। - फोटो : अमर उजाला
देवभूमि क्षत्रिय संगठन की ये हैं मांगें
  • सामान्य वर्ग आयोग की जगह सवर्ण आयोग चाहिए
  • सामान्य वर्ग आयोग की सरकार की ओर से हाल ही में निकाली अधिसूचना महज औपचारिकता है। आयोग की एक्ट बनाकर स्थापना करें। 
  • आयोग में नियुक्तियां मौजूदा प्रावधानों के अनुसार राजनीतिक होंगी। ये गैर राजनीतिक और सक्षम लोगों की होनी चाहिए
  • सवर्ण लोगों के अधिकारों की आयोग रक्षा करे और एससी एसटी एट्रोसिटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसमें कार्रवाई का प्रावधान हो। ये सिविल कोर्ट की तरह काम करे।
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