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मुरारीलाल माहेश्वरी वाद-विवाद स्पर्धा: शिमला मंडल में सोलन कॉलेज ने मारी बाजी

Wed, 21 Aug 2019 08:51 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
राजधानी शिमला के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संजौली कॉलेज में आयोजित मंडल स्तरीय मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति वाद-विवाद प्रतियोगिता में सोलन कॉलेज की टीम प्रथम रही। बुधवार को हुई इस स्पर्धा में कॉलेज छात्रों ने ‘क्षेत्रवाद ने भारतीय संघवाद को कमजोर किया’ विषय पर अपनी बात तर्कों के साथ रखी। प्रतियोगिता में राजीव गांधी महाविद्यालय कोटशेरा की टीम दूसरे और कुमारसैन डिग्री कॉलेज की टीम तीसरे स्थान पर रही। शिमला मंडल के चार जिलों की इस प्रतियोगिता में जिला स्तर पर पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमों ने भाग लिया। रामपुर पीजी कॉलेज और सिरमौर के संगड़ाह कॉलेज की टीम ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किए। 
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प्रतियोगिता में शिमला के एसपी ओमापति जम्वाल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की, जबकि संजौली कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीबी मेहता विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रतियोगिता में संजौली कॉलेज के शिक्षक डॉ. इंद्र सिंह ठाकुर, डॉ. रविंद्र चौहान और डॉ. राम लाल शर्मा ने निर्णायक मंडल सदस्य की भूमिका निभाई। पहला स्थान पाने वाली सोलन कॉलेज की टीम की गीतांजली ठाकुर और रितांशु को सात हजार के नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। दूसरे स्थान पर रही कोटशेरा कॉलेज की टीम में शामिल प्रांशु आदित्य और विवेक को पांच हजार के नकद पुरस्कार और प्रमाण पत्र, जबकि तीसरे स्थान पर रही कुमारसैन कॉलेज की टीम की प्रीतिका और सौरव को तीन हजार रुपये के नकद पुरस्कार से नवाजा गया।
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इसके अलावा प्रतियोगिता में 1500-1500 के दो सांत्वना पुरस्कार संगड़ाह कॉलेज के सतीश तोमर और रीता कुमारी व रामपुर कॉलेज की मुस्कान और रुचि शर्मा को दिए गए। आरकेएमवी की टीम में शामिल सिमरन ठाकुर, मुस्कान आनंद और सराहां कॉलेज की टीम की जयवंती और विशाल शर्मा, नालागढ़ कॉलेज टीम के शैवी और प्रज्ञा को प्रमाणपत्र दिए गए। प्रतियोगिता में अमर उजाला हिंदी समाचारपत्र के इतिहास और संघर्ष की कहानी भी विद्यार्थियों को बताई गई। 

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मंडल स्तरीय वाद विवाद स्पर्धा का शुभारंभ संजौली कॉलेज प्राचार्य डॉ. सीबी मेहता ने दीप प्रज्वलित कर किया। संजौली कॉलेज के संगीत विभाग के छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना पेश की। मंच संचालन डॉ. इंद्र सिंह ठाकुर और कॉलेज के छात्र भगत सिंह ने किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. सीबी मेहता ने कहा कि यहां वाद-विवाद में तर्क के साथ अपने तथ्य रखने वाले छात्रों को देख कर लगा कि युवा कितनी समझ रखते हैं। वह सही दिशा में जा रह हैं। उनमें सकारात्मक सोच के साथ तर्कशक्ति भी विकसित हो रही है। 
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सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करें युवा : एसपी 
एसपी ओमापति जम्वाल ने युवाओं से आह्वान किया कि सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करें और नशे से दूर रहें। उन्होंने अमर उजाला के इस प्रयास की सराहना की। कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा देश के अहम मुद्दों को समझ सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में अपनी सहभागिता बढ़ा सकते हैं। उन्होंने विजेताओं को बधाई दी और कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में ले जाया जा सकता है। 
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संजौली कॉलेज में ‘क्षेत्रवाद ने भारतीय संघवाद को कमजोर किया है’ विषय पर हुई मंडल स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता की विजेता सोलन कॉलेज की टीम की सदस्य गीतांजलि ने विषय के पक्ष में तार्किक बात रखी। गीतांजलि ने कहा कि एक सेना का जवान कभी ये नहीं बोलता कि मैं दक्षिण से हूं, सियाचिन में ड्यूटी नहीं दूंगा। फिर क्षेत्रों से अलग टोपी, अलग पहचान, अलग क्षेत्र, समुदाय का राग क्यों। प्रतिनिधि चुनते हुए उसकी योग्यता नहीं उसका क्षेत्र उसकी भाषा को आधार मान ही चुना जाता है। महाभारत से लेकर जम्मू कश्मीर तक के मुद्दे तक भारत को विभाजित करने के अनेक उदहारण हैं। जिसने भारतीय संघ वाद को कहीं न कहीं कमजोर किया है।
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विषय के विपक्ष में रितांशु ने कहा कि भिन्नता में एकता भारत की पहचान है और शक्ति भी। इससे हर क्षेत्र अपनी संस्कृति अपनी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय पटल तक ले जा सकता है। संविधान भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। विकास के लिए देश का विभाजन जरूरी है। क्षेत्र विशेष से प्रतिनिधि चुने जाते हैं, तो ही वे संसद में अपनी समस्याएं उठाने में सक्षम होते हैं। एक ओडिशा का प्रतिनिधि कैसे हिमाचल प्रदेश की समस्याएं समझेगा और उठा पाएगा। देश का विभाजन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही हुआ है। प्रदेश, क्षेत्र मजबूत होंगे तो देश भी मजबूत होगा। अंत में रितांशु ने कहा कि हम हिंद देश के निवासी सभी जन एक हैं। 

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राजीव गांधी महाविद्यालय कोटशेरा टीम से विषय के पक्ष में बोले प्रांशु आदित्य ने विषय के पक्ष में कहा कि छोटे-छोटे क्षेत्रीय मुद्दों की जगह राष्ट्रीय मुद्दों को तवज्जो दी जानी चाहिए। केंद्र और राज्यों में आपसी सामंजस्य बैठा कर विकास करें। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद अखंड भारत के लिए एक नासूर है, जो देश को खोखला कर देता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 भी सीधे तौर पर क्षेत्रवाद को ही बढ़ावा देता था। 
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छोटे-छोटे क्षेत्र और राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं- विवेक 
विपक्ष में बोलते हुए कोटशेरा कॉलेज के छात्र विवेक ने कहा कि छोटे-छोटे क्षेत्र के विकास से ही राष्ट्र का निर्माण और विकास संभव है। संघीय ढांचे में यह व्यवस्था होती है। आज अलग हुआ छत्तीसगढ़, पंजाब, तेलंगाना, झारखंड भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। क्षेत्रवाद से विकास के मामले में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ती है। 
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