सीना फख्र से चौड़ा और आंखों में गम के आंसू। मंडी जिले के पटणू, मसेरन और द्रंग क्षेत्र के चाउट गांवों के हर शख्स का सीना फख्र से चौड़ा था तो आंखों में गम के आंसू भी तैर रहे थे। इन गांवों के बहादुर बेटे विकास, मनोज और प्रकाश चंद मणिपुर में हुए उग्रवादी हमले में शहीद हो गए हैं। तीनों शहीदों के पार्थिव शरीर शनिवार को भी पैतृक गांव नहीं पहुंचे। परिजनों ने तीन दिन से अन्न ग्रहण नहीं किया। मानपुर (सिरमौर) के शहीद सोहन की पत्नी की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें घर पर ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।
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शहीद बेटे के 'अंतिम दर्शन' को मां ने छोड़ा अन्न, पत्नी भी मरणासन
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मानपुर (सिरमौर) के शहीद सोहन की माता रूकमणि की तबीयत भी बिगड़ गई है। उन्हें भी घर पर ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। लडभड़ोल के पटणू गांव के शहीद विकास भारद्वाज के घर पर सांत्वना देने के लिए लोगों और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। घर के एक कमरे में बैठी मां मीरा देवी और छोटी बहन शिवानी के आंसू सूख चुके हैं। इकलौते बेटे को खोने से परिवार गहरे सदमे में है। मसेरन गांव के शहीद मनोज कुमार की मां कृष्णा देवी, पत्नी पुष्पा देवी की के गले रुंध चुके हैं। मां को यकीन नहीं हो रहा है कि उसका बेटा वतन पर कुर्बान हो गया। रोते बिलखते मां कृष्णा देवी एक ही रट लगा रही हैं कि .... मेरा बेटा घर पहुंच रहा है। द्रंग के चाउट गांव में शहीद प्रकाश चंद की पत्नी ब्यासा देवी व मां रूपी देवी, बहन धर्मा देवी ने भी अन्न ग्रहण नहीं किया। सिर्फ पानी पीकर प्रकाश के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं।
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शहीद बेटे के 'अंतिम दर्शन' को मां ने छोड़ा अन्न, पत्नी भी मरणासन
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मसेरन गांव के शहीद मनोज के घर पर शोक प्रकट करते लोग।
शहीद बेटे के 'अंतिम दर्शन' को मां ने छोड़ा अन्न, पत्नी भी मरणासन
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हीरापुर गांव (बिलासपुर) के शहीद राजेश की पत्नी उनके फोटो का छाती से लगाकर फूट-फूटकर रो रही है।
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मसेरन गांव के शहीद मनोज के बेटा और बेटी अब भी इस बात से अनजान हैं कि उनके पापा देश के लिए कुर्बान हो गए।
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हीरापुर के शहीद राजेश के घर शोक प्रकट करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल।