बहन ने दी भाई को मुखाग्नि---इनपुट: सृष्टिराज शर्मा, लडभड़ोल (मंडी)। समय: सुबह आठ बजे। दिन : रविवार, स्थान : लडभड़ोल तहसील का पटनू गांव। 22 वर्षीय शहीद विकास भारद्वाज के घर जुटी लोगों की भीड़। हर किसी की आंखें नम। तिरंगे में लिपटे ताबूत में रखे शहीद विकास के पार्थिव शरीर को उठाए सेना के अधिकारी और जवान जैसे ही घर पर पहुंचे तो परिजनों के रोते बिलखने की आवाज से माहौल गमगीन हो गया।
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वतन पर कुर्बान शहीदों की चिताओं पर रोया आसमां
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वहां मौजूद हर कोई अपने आंसुओं को नहीं रोक पाया। रविवार सुबह करीब आठ बजे विकास का पार्थिव शरीर घर पहुंचा। करीब आधा घंटे तक पार्थिव शरीर को घर पर रखा, जिसके बाद शव यात्रा शुरू हुई। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
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वतन पर कुर्बान इकलौते बेटे के खोने से मां मीरा देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। विकास की छोटी बहन शिवानी भी भाई के खोने के गम में टूट चुकी है। शहीद की मां मीरा देवी भी रोते बिलखते हुए श्मशानघाट पहुंचीं। ग्रामीण महिलाओं ने किसी तरह से मीरा देवी को रोक कर सांत्वना दी।
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शहीद भाई की चिता को मुखाग्नि देकर बहन शिवानी ने भी इतिहास रचा। शिवानी गम में विलाप करते हुए बार-बार जिद कर रही थी कि भाई को घर ले चलो मैं अपने भाई को राखी बांधूंगी। श्मशानघाट पर शहीद विकास को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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शहीद विकास के पिता राकेश भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने टीवी समाचार सुना कि मणिपुर में सेना के काफिले पर उग्रवादियों ने हमला किया है। तो उन्हें आभास हो गया कि उनके बेटे के साथ भी कोई अनहोनी हुई है, क्योंकि वह बहादुर था तथा अपनी टुकड़ी को लीड करता था।
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जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त मंडी संदीप कदम और जीओसी 39 माउंटेन डिवीजन पालमपुर की ओर से कर्नल सुधीर टोकस, सांसद राम स्वरूप शर्मा, विधायक गुलाब सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र पाल, एसडीएम जोगिंद्रनगर राहुल चौहान, तहसीलदार अजय कुमार सिंह, डीएसपी राजेश कुमार ने शहीद विकास को श्रद्धांजलि दी।
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उपायुक्त संदीप कदम ने बताया कि शहीद विकास के परिवार को सरकार की तरफ से नियमानुसार हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
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शहीद विकास को सलामी देते सेना के जवान।
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इकलौते बेटे विकास के जाने से परिजन गहरे सदमे में हैं।
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'पुष्पा! देखना, एक दिन तिरंगे में लिपटकर घर आऊंगा': पधर (मंडी)। शहीद मनोज की पत्नी पुष्पा देवी बेसुध हैं। रविवार को तिरंगे में लिपटे अपने पति के पार्थिव शरीर पर वो झपट पड़ीं और बेहोश हो गईं।
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परिजनों, रिश्तेदारों ने शहीद मनोज की पत्नी पुष्पा के चेहरे पर ठंडा पानी छिड़ककर दोबारा होश में लाया। होश आते ही वह दहाड़ें मारने लगीं। शहीद पति से पूछने लगी - कहते थे, एक दिन तिरंगे में लिपट कर घर आऊंगा मैं। सच कर दिखाया ना। क्यों किया ऐसा .. क्यों किया? यह कहते-कहते पुष्पा दोबारा बेहोश हो गईं।
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शहीद मनोज की पत्नी पुष्पा को सांत्वना देते स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर।
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रविवार सुबह साढ़े सात बजे तिरंगे में लिपटे शहीद मनोज कुमार की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव मसेरन पहुंची तो परिजनों की चीख पुकार से पूरा गांव शोक में डूब गया। तिरंगे में लिपटे लाडले मोगली को देखकर मां कृष्णा देवी फूट फूट कर रोने लगीं।
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रोते बिलखते हुए शहीद मनोज की मां बोलीं, मेरा मोगली जिस दिन सेना में भर्ती हुआ था, मैंने उसी दिन भारत मां को सौंप दिया था। आज मेरा मनु, मेरा मोगली भारत मां की गोद में सो गया है।
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शहीद मनोज की पत्नी पुष्पा का रो-रोकर बुरा हाल है।
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शहीद मनोज के बड़े भाई संजीव सीआरपीएफ पटना से शनिवार को चंडीगढ़ पहुंचे। शहीद की पार्थिव देह के साथ रविवार सुबह गांव पहुंचे। संजीव ने परिवार के सभी सदस्यों को गले से लगाकर ढांढस बंधाया। मनोज की तीनों बहनें मीना, सुमन, राज ने सेल्यूट करके अपने भाई को अंतिम विदाई दी।
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शहीद मनोज पार्थिव शरीर के साथ आए डोगरा के जवानों ने शहीद मनोज के अंतिम दर्शन परिजनों को करवाने से पहले कहा कि उनका चेहरा नहीं रहा है। ऐसे में उपस्थित सभी लोग भावुक हो गए। ताबूत को बिना खोले मनोज के बेटे अरनव के हाथों घर पर मंत्रोच्चारण के साथ शहीद की अंतिम रस्म को पूरा करवाया गया।
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प्रकाश को देख बेहोश हो गईं पत्नी, मां और बहन- पधर (मंडी)। ग्राम पंचायत सियुन के चाउट गांव के शहीद हवलदार प्रकाश चंद का पार्थिव शरीर रविवार सुबह आठ बजे घर पहुंचा।
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जैसे ही सेना के जवान तिरंगे में लिपटे शहीद प्रकाश चंद के पार्थिव शरीर को लेकर घर पहुंचे तो परिजनों की चीखो पुकार से पूरा गांव शोक में डूब गया। शहीद की पत्नी ब्यासा देवी, मां रूपी देवी और इकलौती बहन धर्मा देवी पार्थिव शरीर से लिपट पड़ीं।
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शहीद प्रकाश चंद को बेटे अंकित ने मुखाग्नि दी। बुखार से पीड़ित अंकित भी पिता को देख कर फूट-फूट कर रोया। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह शहीद प्रकाश को सलामी देते हुए।
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सुबह से ही प्रकाश के घर पर सैकड़ों लोग जुटे हुए थे। शहीद प्रकाश चंद के गम में पूरा गांव रो पड़ा। पत्नी, मां और बहन बेहोश हो गईं। मां रूपी ने कहा, मेरा जांबाज बेटा भारत मां के चरणों में सो गया है।
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डोगरा रेजीमेंट में लंबी सेवाएं देने के बाद पदोन्नति के साथ प्रकाश चंद अगले वर्ष सेना से सेवानिवृत्ति लेने वाला था। प्रकाश ने इस खुशी में नया घर बना रखा था। शहीद हवलदार प्रकाश चंद को सलामी देते सेना के जवान।
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शहीद प्रकाश का सुराहन गांव स्थित श्मशानघाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह, सेना की ओर से कर्नल हरप्रीत सिंह, सांसद राम स्वरूप शर्मा, एडीसी मंडी रूग्वेद सिंह, एसडीएम विनय मोदी ने शहीद हवलदार प्रकाश चंद को श्रद्धांजलि अर्पित की। द्रंग कांग्रेस के अध्यक्ष जोगिंदर गुलेरिया, चंद्रशेखर ठाकुर, कैप्टन हेम सिंह, चंद्रमणी शर्मा और जवाहर ठाकुर भी यहां मौजूद थे।
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सोहन को तिरंगे में लिपटा देख पत्नी बेहोश, घर के पास खेत में किया दाह संस्कार इनपुट: आदेश शर्मा राजपुर (सिरमौर)। मानपुर देवड़ा के शहीद सोहन सिंह का ताबूत जैसे ही रविवार सुबह घर के आंगन में पहुंचा तो पत्नी बेहोश हो गई।
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शहीद सोहन सिंह के भाई हरमिंदर सिंह, मोहन सिंह सोहन का मुंह देखना चाहते थे, लेकिन उनकी यह हसरत पूरी नहीं हो पाई।
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शहीद सोहन सिंह की एक साल की बेटी नवनीत कौर रोने लगी तो सेना के नायक मनोहर सिंह ने उसे गोद में उठा लिया। नवनीत की को रोता देख मनोहर भी खुद को नहीं रोक पाए और सिसकने लगे।
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रविवार तड़के 3:30 बजे तिरंगे में लिपटे सोहन सिंह का पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से पांवटा पहुंचा। 5:30 बजे सेना की एंबुलेंस गिरि पार पहुंची। रास्ते में लोगों के हुजूम और अपने लाडले सोहन के अंतिम दर्शनों को उमड़ी भीड़ के कारण उनका पार्थिव शरीर 8:30 बजे मानपुर देवड़ा गांव पहुंचा।
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शहीद सोहन सिंह की माता रुकमणी कौर का रो-रोकर बुरा हाल है।
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शहीद सोहन सिंह का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही पिता सुखेदव, माता रुकमणी कौर, पत्नी रजनी, भाई हरमिंदर एवं मोहन सहित हजारों लोग फूट-फूट कर रोने लगे। शहीद सोहन सिंह के पिता सुखेदव।
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परिजनों की इच्छा के चलते शहीद सोहन का अंतिम संस्कार यमुना घाट के बजाय घर से मात्र 100 मीटर की दूरी पर उनके अपने खेत में ही किया गया।
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शहीद सोहन सिंह के परिजनों ने कहा कि वे अपने लाल को यमुना किनारे नहीं घर में ही रखेंगे।
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शहीद सोहन सिंह को श्रद्घाजंलि देने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव बिंदल, पच्छाद के विधायक सुरेश कश्यप, शिलाई के विधायक बलदेव तोमर आदि मौजूद रहे।
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शहीद सोहन सिंह की पत्नी रजनी गहरे सदमे में है। उनका रो-रोकर बुरा हाल है।
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नंगे पांव श्मशानघाट पहुंचीं शहीद अशोक की पत्नी अंजना, शहीद की अंतिम विदाई में सेना के जवान भी फफक पड़े-हरिपुरधार (सिरमौर)। शहीद अशोक राणा की पत्नी अंजना खुद को नहीं रोक पाई और नंगे पांव रोते-बिलखते श्मशानघाट पहुंच गईं। बदहवास अंजना को देख वहां मौजूद बच्चे, बूढ़े और जवान भी रो पड़े।
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शहीद अशोक की पत्नी अंजना अंजना के पीछे-पीछे शहीद की माता व तीनों बहनें भी शमशानघाट पहुंच गईं। पत्नी अंजना ने बिलखते हुए कहा कि वह इस पल अपने पति को अकेले कैसे छोड़ सकती है। यह सुनकर सेना के जवान भी फफक पड़े। 4 जून को आतंकी हमले में शहीद हुए हरिपुरधार के अशोक राणा का रविवार को मटियानी श्मशानघाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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हजारों नम आंखों ने शहीद अशोक को अंतिम विदाई दी। शवयात्रा के दौरान उनके घर से श्मशान घाट तक ‘अशोक राणा अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा, अशोक तेरा नाम रहेगा’ के गगन भेदी नारों से पूरी हरिपुरधार घाटी गूंज उठी।
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6 डोगरा रेजीमेंट व पैरा स्पेशल फोर्स के जवानों ने शहीद अशोक राणा को सशस्त्र सलामी दी। उसके बाद शहीद के बड़े भाई जगत राणा ने अपने छोटे भाई को मुखाग्नि दी।
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शहीद के अंतिम दर्शन के लिए रविवार सुबह 4 बजे से ही लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। करीब 7.30 बजे जैसे ही शहीद अशोक राणा के तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सेना की गाड़ी से उनके आंगन में उतारा गया तो पत्नी अंजना, माता रईनो देवी, बहनें बबली, रेखा व किरण की रोने एवं चीखों से वहां पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पिता बलदेव राणा, चाचा दलीप, भाई जगत राणा, बृजराज ठाकुर, सन्नी व संजय भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
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तिरंगे से लिपटे पति को सीने से लगाकर फूट फूटकर रोने लगी मीनाक्षी- हीरापुर (बिलासपुर)। मणिपुर उग्रवादी हमले में शहीद हुए राजेश चंदेल का शव जब तिरंगे से लिपटा हुआ उनके पैतृक गांव हीरापुर पहुंचा तो परिजनों का विलाप देखकर हर कोई रो पड़ा। तिरंगे से लिपटी पार्थिव देह को देखकर पत्नी मीनाक्षी पति के सीने से लिपट कर बिलख बिलख कर रोने लगी।
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शहीद राजेश चंदेल बेटा आयुष भी फफक-फफक कर रो रहा था। इस मुश्किल घड़ी में तीन दिनों तक परिवार को ढांढस बंधाने वाले पिता जोगेंद्र सिंह भी आज अपने आंसूओं नहीं रोक पाए। सैन्य सम्मान के साथ जब शहीद जवान की अंतिम यात्रा निकली तो परिवार की महिलाएं गश खाकर गिर पड़ी। ह्दय विदारक इस दृश्य को देखकर हर किसी की आंखे नम थी।
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शहीद बेटे को जब पिता ने किया आखिरी सेल्यूट- औहर में गोबिंदसागर के किनारे स्थित स्थानीय शमशानघाट पर जब शहीद राजेश कुमार का दाह संस्कार किया गया तो सेना और पुलिस के जवानों ने सलामी दी। इस मौके पर अपने लाडले बेटे पिता जोगेंद्र सिंह ने आखिरी सेल्यूट किया। पिता को मुखाग्नि देने के बाद पोता (शहीद राजेश का बेटा) आयूष गश खाकर गिर गया।
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शहीद राजेश चंदेल को सलामी देते हिमाचल पुलिस के जवान।
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शहीद राजेश चंदेल को सलामी देते सेना के जवान।
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तिरंगे में लिपटे पति के ताबूत को देख बेसुध हो गई पत्नी- रक्कड़/देहरा (कांगड़ा)। मणिपुर आतंकी हमले में शहीद हुए देहरा के मूंही गांव के रजनीश कुमार का पार्थिव शरीर सुबह करीब 6 बजे पैतृक गांव पहुंचा। शहीद का पार्थिव शरीर ताबूत में तिरंगे में लिपटा था। तिरंगे में लिपटे पति के ताबूत को देख पत्नी सविता बेसुध हो गई।
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शहीद रजनीश कुमार को कालेश्वर महादेव में व्यास नदी के किनारे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। बेटा सूजन (11) शहीद पिता को मुखाग्नि देते वक्त फूट-फूट कर रो रहा था। ऐसा देख अंत्येष्टि में पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण भी आंसू नहीं रोक पाए।
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शहीद रजनीश कुमार की पत्नी सविता बिलख-बिलख कर रो रही है।
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योल कैंट से पहुंचे सेना के जवानों ने हवा में फायर कर शहीद रजनीश को सलामी दी।
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शहीद रजनीश का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचते ही घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
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शहीद रजनीश को श्रद्धांजलि देने के लिए जिला कांगड़ा के डीसी रितेश चौहान, एसपी अभिषेक दुल्लर, देहरा के विधायक रविंद्र सिंह रवि, जसवां परागपुर के विधायक विक्रम ठाकुर, पूर्व विधायक नवीन धीमान, सुरेंद्र मनकोटिया सहित कई लोग मौजूद थे।