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महर्षि वेद व्यास ने यहां लिखा था संसार का पहला 'ग्रंथ'

Sat, 02 May 2015 05:31 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
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शायद ही आप यह जानते होंगे की महर्षि वेद व्यास ने दुनिया का पहला ग्रंथ इसी स्थान पर लिखा था। यहां आज भी उनका मंदिर है और स्थानीय लोग उनकी पूजा करते हैं। देखिए तस्वीरें और जानिए रहस्य..

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महर्षि वेद व्यास ने यहां लिखा था संसार का पहला 'ग्रंथ'

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यह पवित्र स्‍थान देव भूमि हिमाचल के कुल्लू जिला में हैं। यहां पर रोहतांग दर्रे में अपुन नामक स्‍थान पर महर्षि वेद व्यास जी का मंदिर है। यहां पर ही महर्षि वेद व्यास ने संसार की प्रथम पुस्तक ‘वेद की रचना की थी।
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वेद व्यास महान ऋषि थे जिन्होंने वेदों को चार भागों में वर्णन किया था। इतना ही नहीं यहां पर ही वेद व्यास ने महाभारत की रचना ही नहीं कि बल्कि उसके हर एक अंश को खुद अनुभव भी किया है।

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वेद व्यास का पूरा नाम कृष्णद्वैपायन है। मगर वेदों की रचना करने के बाद वेदों में उन्हें वेद व्यास के नाम से ही जाना जाता है। उनके द्वारा रची गई श्रीमद्भभागवत गीता भी उनके महान ग्रंथ महाभारत का ही हिस्सा है।
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पौराणिक महाकथाओं में जिन विशाल पर्वतों भृगतुंग, इंद्रासन और देव टिब्बा का उल्लेख आया है, वे सभी यहीं पर स्थित हैं। रोहतांग दर्रा हर वर्ष मई व जून महीने में आवाजाही के लिए खुलता है। अक्तूबर-नवंबर तक यहां सैलानियों की खूब चहल-पहल रहती है।
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महर्षि वेद व्यास ने वेद और महाभारत ही नहीं बल्कि 18 पुराणों की रचना भी इसी स्‍थान पर की थी। इस स्‍थान से ऊंचे पर्वतों का विहंगम नजारा देखने को मिलता है।
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ब्यास कुंड ब्यास नदी का उद्गम स्थान है। इस कुंड के पानी के स्वाद का वर्णन शब्दों में संभव ही नहीं है। शायद अमृत का स्वाद ऐसा ही होता होगा। यह कुंड वेद ब्यास ऋषि के मंदिर में ही स्थित है।'

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महर्षि व्यास के नाम से ही इस नदी का नाम ब्यास पड़ा है। इससे पहले नदी का नाम अर्जिकुजा व विपाशा माना जाता है। ब्यास नदी रोहतांग से निकलकर मनाली से होते हुए मंडी और फिर कांगड़ा होते हुए फिरोजपुर पंजाब तक जाती है। यहां कपूरथला में इसका सतलुज नदी में मिलन हो जाता है।
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महर्षि व्यास मंदिर में आज भी सैलानी आकर खुद को धन्य मानते हैं और दिव्य कुंड का पानी पीकर कृताथ होते हैं। इस पानी की तुलना लोग अमृत से करते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सैलानियों को पहले मशहूर पर्यटन स्‍थल मनाली और यहां से वाहन के माध्यम से 52 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद रोहतांग पहुंचना होता है।
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