हिमाचल प्रदेश के धार्मिक अनुष्ठानों में बलि प्रथा पर रोक के बावजूद हिमाचल और उत्तराखंड में शुरू हुए माघी त्यौहार के पहले दिन हजारों बकरों की बलि दी गई।
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तस्वीरें: माघी त्यौहार पर लाखों बकरों की बलि
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हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के समूचे गिरीपार क्षेत्र में सोमवार से पारंपरिक ‘भातियोज’ के साथ एक माह तक मनाया जाने वाला माघी त्योहार शुरू हो गया है। इस त्यौहार में महीने भर बकरों को काटा जाता है, जिसकी संख्या लाखों में पहुंच जाती है।
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हिमाचल के शिलाई, पांवटा, राजगढ़ एवं रेणुका के 592 गांवों में पारंपरिक माघी त्योहार मनाया जा रहा है। वहीं उत्तराखंड के जोनसार क्षेत्र की 105 पंचायतों में भी इसी प्रकार की परंपरा के साथ माघी त्योहार शुरू हुआ।
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किवंदति के अनुसार पूरे क्षेत्र में सैकड़ों वर्ष पूर्व मां काली के रथ टूटते थे। इससे असंख्य लोग काल के ग्रास बन जाते थे। इस दौरान महामारी भी फैलती थी। इससे बचने के लिए माघी के दिन सैकड़ों बकरों को काटकर मां काली को प्रसन्न किया जाता था।
भातियोज के दिन प्रात: 4 बजे उठकर सभी घरों में काली मां के नाम पर आज भी आटा और गुड़ से तैयार किया गया खेंडा (हलवा) काली माता को चढ़ाया जाता है। इसके बाद घर में बकरों को काटने के लिए रखे गए औजार ‘डांगरा’ एवं ‘दरांट’ की पूजा की जाती है। इस मौके पर ग्रामीण ‘ऐलो बोशतों दोतिए ढिंयू, रमाणे भुजे भांगो रे गिंऊ’ पारंपरिक लोक गीत बुजुर्गों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।