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भोले को खुश करने के लिए यहां चढ़ाते हैं भांग की सिगरेट

Sat, 28 Sep 2019 06:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर योगेश शर्मा, अमर उजाला, अर्की (सोलन)
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- फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव के असंख्य रूप हैं और कई तरीकों से उनकी पूजा की जाती है। जिला सोलन के अर्की में शिव की लटाओं के नाम से मशहूर लुटरू महादेव मंदिर है। मंदिर का निर्माण वर्ष 1621 में बाघल रियासत के राजा ने किया था। यह मंदिर विशाल गुफा में बना है जिसकी लंबाई लगभग 61 फीट और चौड़ाई 31 फीट है। इस गुफा के भीतर स्वयंभू शिवलिंग बना है। शिव लिंग पर शिव की लटाएं हैं। दाहिनी ओर गुफा के ठीक ऊपर करीब 5 मीटर के गोलाकार का छेद बना है जहां से सूर्य की किरणें आती हैं शिवलिंग पर भी पड़ती हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
खास बात यह है कि यहां शिवलिंग पर फूल, फल, दूध-जल, धतूरा और अन्य मिष्ठान तो चढ़ाए जाते हैं, लेकिन शिव को भांग से भरी सिगरेट सुलगाकर भी रखी जाती है। जली हुई सिगरेट खुद खत्म हो जाती है और शिव प्रसन्न हो जाते हैं।  पिछले कई वर्षों से इस मंदिर में रह रहे 1008 बाबा कृपाल भारती ने बताया कि यहां हर रोज 4 पहर की पूजा-अर्चना होती है।
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सुबह करीब 4 बजे से दौर चलता है। उनका कहना है कि स्वयंभू शिवलिंग में बने एक छेद में आराध्य के लिए सिगरेट रखी जाती है। शिव को भांग का धुआं देना यहां पहले से होता आ रहा है। उनका मानना है कि अगर शिव को भांग या उससे भरी सिगरेट अर्पित न करें तो वह नाराज हो जाते हैं और इलाके में अनहोनी घटनाएं होना शुरू हो जाती हैं। संक्रांति पर तड़के यहां खुद ही ओम की ध्वनि गूंजती है। 

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- फोटो : अमर उजाला
इसी दिन यहां से कुछ ही दूरी पर बने शक्नी नामक शिव स्थान पर बने जलाशय में कोयले और राख पानी में घुले हुए दिखाई देते हैं। यह कहां से आते कोई नहीं जानता। मान्यता के अनुसार सतयुग में अगस्त मुनि ने यहां तपस्या की और उन्हीं के नाम पर शहर का नाम अर्की पड़ा।
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उन्हीं के आग्रह पर यहां शिव स्वयंभू शिवलिंग में प्रकट हुए। स्वप्न आने पर राजा ने मंदिर बनवाया। शिवलिंग पर बनी लटाओं में पहले दूध बहा करता था लेकिन एक गडरिये के हाथ लगाने के बाद बंद हो गया।
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- फोटो : अमर उजाला
अब इनसे पानी रिसता है। हालांकि, अब भी संक्रांति के खास मौके पर दूध की धारा बहती है। इस चमत्कार को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
अर्की का लुटरू महादेव मंदिर : वर्ष 1621 में गुफा में बने इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग पर भोले की लटाएं हैं। पहले दूध की धारा निकलती थी। अगस्त मुनि के नाम पर यह शहर अर्की कहलाया।
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