गिनीज बुक से मिले जवाब में कहा गया है कि जल्द इस संबंध में उनका भारत स्थित कार्यालय उनसे संपर्क करेगा। पहले उनकी टीम ट्रैक का खुद निरीक्षण करेगी। एनजीओ अध्यक्ष एडवोकेट सुदर्शन ठाकुर ने बताया कि गिनीज बुक को भेजे गए ई-मेल में मणिमहेश ट्रैक रूट की पूरी भौगोलिक स्थिति, ट्रैक की दूरी और ग्लेशियरों से लकदक तीनों दर्रों का हवाला दिया है।