सरकारी कर्मचारियों के कामकाज, उनकी छुट्टियों से सब वाकिफ हैं। कई लोग सरकारी नौकरी में पूरी मौज करते हैं, लेकिन इस कर्मचारी ने सबके लिए मिसाल कायम कर दी है। अफसर भी इस कर्मचारी के कायल हैं। आइए जानते हैं पूरी कहानी-
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अपनी साढ़े 11 साल की नौकरी में इस कर्मचारी ने एक भी छुट्टी नहीं ली। और न ही पूरी नौकरी में छुट्टी लेने का इरादा है। साप्ताहिक अवकाश पर भी वह काम करते हैं। उनके सैकड़ों अर्जित अवकाश लैप्स हो गए हैं। इस अरसे में सगे ताया, भतीजी और न जाने कितने ही रिश्तेदारों का अकाल निधन हो गया लेकिन कर्म को पूजा मानने वाले एचआरटीसी के नाहन डिपो में कार्यरत कंडक्टर जोगिंद्र ठाकुर (42) ड्यूटी देने से पीछे नहीं हटते।
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जोगिंद्र सिंह का भरा-पूरा परिवार है। पत्नी, बेटा-बेटी, माता-पिता और अन्य सगे संबंधी भी हैं। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, उनका अटल इरादा आज तक टस से मस नहीं हुआ। जिला सिरमौर के संगड़ाह के रजाणा निवासी जोगिंद्र ठाकुर चार जून 2005 को एचआरटीसी में बतौर कंडक्टर तैनात हुए। तब से वह नियमित ड्यूटी दे रहे हैं।
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वह रोजाना 200 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। वर्तमान में नाहन-घाटों रूट पर सेवाएं दे रहे हैं। हमेशा वर्दी में सेवाएं देते हैं। उनकी ईमानदारी और मधुर स्वभाव की सवारियां ही नहीं, निगम प्रबंधन भी कायल है। वह जिस भी रूट पर सेवाएं देते हैं, निगम की कमाई बढ़ना शुरू हो जाती है।
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दुखद है कि आज तक की सेवा में सरकार और निगम की ओर से उन्हें कोई अवार्ड नहीं दिया गया। हां, इतना जरूर है कि बेकार रूट की इनकम बढ़ाने के लिए उन्हें मात्र 500 रुपये नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र मिल चुका है। इससे पहले जोगिंद्र एक निजी बस में भी सेवाएं दे चुके हैं। यहां भी उन्होंने वर्षों तक छुट्टी नहीं ली।
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जोगिंद्र का कहना है कि उनकी पत्नी और बच्चों के सहयोग से ही यह संभव हो पाया है। ड्यूटी पूरी होने के बाद बचा समय मैं अपने परिवार के साथ गुजारता हूं। अगर मेरा नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल होता है तो मुझे खुशी होगी। जोगिंद्र का दावा है कि साढ़े 11 साल में उसने मात्र तीन दिन पूरे घर पर गुजारे हैं। अक्तूबर 2011, अक्तूबर 2013 में दिवाली पर और 2015 में एक बार सड़क बंद होने की वजह से वह घर पर रहे।
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एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव बिष्ट ने बताया कि जोगिंद्र अपनी ड्यूटी के प्रति बहुत ईमानदार हैं। आज तक उनकी कोई शिकायत नहीं मिली। जिस रूट पर वह सेवाएं देते हैं, उसकी आय बढ़ जाती है। समय, कायदे-कानून के पाबंद हैं।
उनके अनुसार जोगिंद्र ने कभी छुट्टी नहीं ली। वह साप्ताहिक अवकाश भी नहीं लेते हैं। बिष्ट ने बताया कि मैंने स्वयं जोगिंद्र को पत्र लिखकर छुट्टी लेने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने लिखित में दिया कि मैं छुट्टी नहीं लेना चाहता।