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50 साल बाद बेटे को साथ लेकर इसलिए श्राईकोटी पहुंचे सीएम

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह करीब पांच दशक बाद ऐतिहासिक श्राईकोटी माता मंदिर में दर्शन करने पुत्र विक्रमादित्य के साथ पहुंचे।
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इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां निसंतान दंपति अपनी संतान मांगने के लिए आते हैं और जब संतान पैदा होती है तो माता-पिता उसे माथा टेकने के लिए जरूर लाते हैं।
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वीरभद्र सिंह अपने बेटे के साथ पहली बार श्राईकोटी मंदिर में माथा टेकने पहुंचे।

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मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी श्राईकोटी माता मंदिर जाने का कार्यक्रम बनाया था, लेकिन उस समय उनका यह कार्यक्रम सिरे नहीं लगा था। रविवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे और मौसम बरसने की तैयारी में था।
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जैसे ही मुख्यमंत्री ने सरटू से श्राईकोटी माता मंदिर का रास्ता तय करना आरंभ किया तो बादल बरसने लगे। सरटू से मुख्यमंत्री आधे रास्ते तक सेना की जिप्सी में गए। इसके बाद सेना के घोडे़ विराट पर सवार होकर मंदिर के पास पहुंचे।
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यहां से सीएम पैदल मंदिर तक गए। युकां प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सेना के घोडे़ पल्सर पर सवार थे।
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जहां से मुख्यमंत्री घोडे़ पर सवार हुए वहां से मंदिर तक सीपीएस नंदलाल, डीसी दिनेश मल्होत्रा, एसपी डीडब्ल्यू नेगी एसडीएम दलीप नेगी, कर्नल राजा बेलू सहित अन्य अधिकारियों को पैदल मार्च करना पड़ा।
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सेना के घोडे़ विराट पर सवार सीएम वीरभद्र और 'पल्सर' पर सवार युकां प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य।
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