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हिमाचल में बनी खांसी-जुकाम की दवा छापे के बाद जब्त, बिक्री पर लगी रोक

Mon, 17 Feb 2020 11:17 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला/कालाअंब (सिरमौर)
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हिमाचल के कालाअंब स्थित मैसर्ज डिजिटल विजन दवा कंपनी में तैयार हो रहे कोल्ड बेस्ट पीसी सीरप की रिकवरी को स्टेट ड्रग कंट्रोलर की टीम ने दो जगह छापे मारे। छापे के दौरान 300 बोतल दवा जब्त की गई है। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में कई बच्चों की मौत और किडनियां खराब होने के बाद जम्मू-कश्मीर के स्टेट ड्रग कंट्रोलर की ओर से जारी लेटर के आधार पर की गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यह लेटर हिमाचल, हरियाणा समेत कई राज्यों को भेजा गया है। इसी के चलते रविवार को हिमाचल दवा प्राधिकरण ने भी कालाअंब में दबिश देकर सैंपल भरे हैं। इन्हें लैब भेजा है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने बताया कि रिपोर्ट आने तक दवा की बिक्री पर पाबंदी लगा दी गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
उल्लेखनीय है कि अगर दवा में पीजीआई की ओर से बताए केमिकल डाइथिलेन ग्लाइकोल होने की पुष्टि हो गई तो फिर दवा निर्माण करने वाली कंपनी के प्रबंधकों के साथ इसे बिना बिल के बेचने वाले केमिस्ट शॉप मालिकों को कड़ी सजा मिल सकती है। ऐसे मामलों में जुर्म साबित होने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले में लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही अधिकारी अगली कार्रवाई की बात कह रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यह बिलकुल सही है कि कोल्ड बेस्ट सीरप के सेवन की वजह से जम्मू कश्मीर के रामनगर एरिया में कई बच्चों की मौत हो गई। इस दवा के सेवन से बच्चों की किडनी पर ज्यादा असर पड़ा है। दवा की जांच में पीजीआई ने भी इसमें डाइथिलेन ग्लाइको होने की बात कही है। यह बेहद खतरनाक केमिकल है जोकि सेहत के लिए हानिकारक है। आज छापे में 300 बोतल सीरप जब्त किया है। जिसे जांच के लिए लैब में भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई तय होगी।  - डॉ. नरेंद्र आहुजा, स्टेट ड्रग कंट्रोलर, हरियाणा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
फार्मा हब के रूप में विख्यात हिमाचल के उद्योगों में निर्मित होने वाली दवाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साल 2019 में प्रदेश के उद्योगों में बनी 100 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। वर्ष 2018 में भी देशभर में फेल हुईं 350 दवाओं में से हिमाचल की 100 से अधिक दवाएं शामिल रहीं। 2020 के जनवरी माह में देशभर में लिए गए सैंपलों में से फेल हुई 34 दवाओं में सूबे के उद्योगों की चार दवाएं फेल हो गए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
वर्ष 2008 में बद्दी में बनी दवा भी सवालों के घेरे में आई थी। उस दौरान राजस्थान में एक शिविर लगा था, जिसमें इस दवा से लोग अंधेपन का शिकार हो गए थे। इस दवा के सौ बैच के लाइसेंस रद्द किए गए थे।
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