52 वर्षों से यहां देवता हर वर्ष सागर से निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। जानिए कैसे डूबा यह आस्था का शहर और जलमग्न हुए देवता। देखिए तस्वीरें, जानिए पूरी कहानी..
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सागर से हर बरस निकलते हैं देवता, देते हैं दर्शन
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देवभूमि हिमाचल के ऐतिहासिक शहर बिलासपुर की गोबिंद सागर झील में समा चुके ऐतिहासिक मंदिर हर साल जल मग्न हो जाते हैं और पानी घटने पर फिर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
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पिछले 52 वर्षों से बिलासपुर के ऐतिहासिक पुराने शहर में बने मंदिर गोबिंद सागर झील में डूब जाते हैं। इन मंदिरों को सरकार ने रिलोकेशन करने का फैसला लिया था। मगर आज तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया।
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अब इन मंदिरों की कहानियां लोक गायकों, कवियों और साहित्यकारों की रचनाओं तक ही सिमट कर रह गई हैं। गोबिंद सागर झील में डूबकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे इन ऐतिहासिक मंदिरों का अपना ही महत्व है।
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झील में डूबने के कारण इन मंदिरों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। पातालेश्वर केदार मंदिर का एक दृश्य।
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बिलासपुर के पुराने शहर रत्नपुर में ऋषियों मुनियों ने तपस्या की है। इसी दौरान उन्होंने इन मंदिरों का निर्माण किया। ऐतिहासिक महत्व के इन मंदिरों को बचाने के लिए सरकार ने आंखे मूंद ली है।
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साहित्यकार कुलदीप चंदेल के अनुसार बिलासपुर का रंगनाथ मंदिर, गोपाल मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, बाह का ठाकुरद्वारा, खनमुखेश्वर, रघुनाथ मंदिर और रंग महल पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं।
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कई मंदिर तो गर्मियों में झील का जल स्तर घटने पर पानी से बाहर आ जाते हैं। मगर करीब एक दर्जन मंदिर पानी में पूरी तरह से समा चुके हैं।
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देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू महत्वाकांक्षी परियोजना भाखड़ा बांध का उद्घाटन किया था तो उस समय में आश्वासन दिया गया था कि शहर की धरोहर को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। मगर धरातल पर आज तक कुछ नहीं हुआ।
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बावजूद इसके लोगों में इन मंदिरों को लेकर अपार आस्था है। हर बरस जैसे ही मंदिर पानी से बाहर निकलते हैं तो लोग इनके दर्शन के लिए पहुंच जाते हैं।
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जल मग्न आस्था।
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लगातार पानी में डूबे रहने के कारण कई मंदिर गिरने की कगार पर पहुंच चुके हैं और ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन सभी मंदिर अपना अस्तित्व खो बैठेंगे।
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जल मग्न आस्था।
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9वीं शताब्दी में बने इन मंदिरों में पर की नक्काशी भी काफी मनमोहक है। शायद अब ऐसे मंदिरों का निर्माण हो सकता है। बावजूद इसके सरकार इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है।