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हौंसले को सलाम, घर के आंगन से निकल शासन की बागडोर संभालती बेटियां

Mon, 27 Jan 2020 11:35 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
कभी घर के आंगन में किलकारी बनकर घूमने वाली बेटियां अब दहलीज से बाहर शासन के दरवाजों पर दस्तक देती दिख रही हैं। छोटे कस्बे से निकली बेटियां हों या मेट्रो सिटी की पेंपर्ड गर्ल दोनों ही आने वाली पीढ़ियों के लिए मानक स्थापित कर रही हैं। बचपन से पिता और माता के शासन में पली बढ़ीं ये बेटियां अब शासन में पहुंचकर जनता तक योजनाओं को सही ढंग से पहुंचाने को कटिबद्ध हैं। पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक संवेदनशील ये महिला अधिकारी जनता की समस्या को न केवल दिमाग से बल्कि दिल से हल करने की कोशिश कर रही हैं।
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प्रेरणा सिंह - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के चाणक्यपुरी जैसे वीवीआईपी क्षेत्र में पली-बढ़ीं 27 वर्षीय प्रेरणा सिंह कांठ तहसील में एसडीएम हैं। 2017 बैच की आईएएस प्रेरणा बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें काफी प्यार और लाड़ मिला है। इलेक्ट्रॉनिक्स कम्यूनिकेशन में अपनी स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। उसके बाद ही सरकारी सेवा की ओर रुख किया। पहले ही प्रयास में आईएएस उत्तीर्ण किया। 
एटा, कानपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद अगस्त 2019 में कांठ में एसडीएम के तौर पर तैनाती मिली। प्रेरणा सिंह कहती हैं कि जिस माहौल में परवरिश हुई उसके मुकाबले फील्ड पर काफी अंतर है। मेरा प्रयास है कि प्रशिक्षण के दौरान जो सपने हमने देखे हैं उनको सेवा के दौरान लागू करके जनता की अधिक से अधिक सेवा करूं। उन्होंने कहा कि बेटियां अपनी शिक्षा पर ध्यान दें। आत्मनिर्भर बनें, आने वाला युग उनका है।
 
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इल्मा अफरोज - फोटो : अमर उजाला
कुंदरकी जैसे छोटे कस्बे से निकलकर आईपीएस तक का सफर तय करने वाली इल्मा अफरोज इन दिनों हैदराबार की पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। दिल्ली के सेंट स्टीवेंस से स्नातक और उसके बाद इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से परास्नातक की शिक्षा ग्रहण करने वाली इल्मा कहती हैं कि देश से बाहर निकलकर देश की कीमत समझ आती है। 
मुझे मेरे कस्बे, जिले और देश ने इतना कुछ दिया है कि जीवन भर सेवा करने के बाद भी ऋण नहीं चुका सकती। हैदराबाद जैसे कांड से आहत इल्मा कहती हैं कि पुलिस की नौकरी में बेटी होने के नाते मेरा पहला कर्त्तव्य होगा बेटियों पर होने वाले अत्याचारों को पुरजोर तरीके से रोकना। वो चाहती हैं कि सभी मां-बाप अपनी बेटियों को खूब पढ़ाएं और आत्मनिर्भर बनाएं। वो बेटियों से भी यही इच्छा रखती हैं कि वह मां-बाप के भरोसे को बनाए रखें और उनके सपनों का सम्मान करें।
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पूनम सिरोही - फोटो : अमर उजाला
सेना में सूबेदार रहे पिता बलराज सिंह और एयरफोर्स में रहे चाचा को देखकर पली पढ़ी अमरोहा के गांव मोहम्मदपुर निवासी पूनम सिरोही को शुरू से ही वर्दी पहनने का सपना था। पूनम ने कड़ी मेहनत और लगन से सहायक अध्यापक से पीपीएस तक का सफर तय किया। पिता और चाचा की तरह वह सेना में तो नहीं जा पाए। 
लेकिन पुलिस में भर्ती होकर वर्दी पहनने का अपना सपना पूरा कर लिया। पूनम की वर्तमान में तैनाती मुरादाबाद में सीओ कटघर के पद पर है। इससे पहले उनका चयन पीपीएस राजस्थान में हुआ था। वह दो साल तक हसनपुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात रही।
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