महिलाएं शादी क्यों नहीं करना चाहती हैं
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क्या होती है वजह
अध्ययन के नतीजों से यह बात सामने आई कि रिश्तों को चलाने के लिए पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा काम और मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि एक तरह से गृहस्थी की जिम्मेदारी हमारे देश में महिलाओं के हिस्से में ही डाल दी जाती है। रिलेशनशिप एक्सपर्ट की मानें तो महिलाएं रिश्तों को निभाने के साथ-साथ घर के कामकाज, जैसे कि खाना बनाना, घर-परिवार का ध्यान रखना, बच्चों की परवरिश करना और रिश्तों में होने वाली छोटी-मोटी लड़ाइयों का निपटारा करने जैसी चीजों में इतना ज्यादा उलझ जाती हैं कि एक समय के बाद उनकी रिश्तों के प्रति रुचि ही खत्म हो जाती है। उन्हें ये सब उलझन प्रतीत होने लगता है। वे अपना ‘मी’ टाइम मिस करने लगती हैं। नतीजतन, वे विवाह के बंधन से दूर भागने लगती हैं।
शादी और बच्चे को औरत की संपूर्णता से जोड़ने वाला यह दृष्टिकोण वक्त के साथ बदला है। अब सिर्फ शादी और बच्चे पैदा करना ही किसी महिला की प्राथमिकता नहीं रह गई है। 35 वर्षीय अकाउंटेंट प्रेरणा बताती हैं कि वे सिंगल वीमेन हैं। उन्हें विवाह करने की जरूरत कभी महसूस नहीं हुई।
वह कहती हैं, “मेरी जिंदगी में भी बहुत से लोग और दोस्त हैं, जिनके साथ मैं खुश हूं।” उनके साथ उनकी ही एक दोस्त भी रहती हैं। दोनों अपनी जिंदगी में खुश हैं। अब तो घरवालों ने भी हारकर उन्हें शादी के लिए बोलना छोड़ दिया है। मजरूह सुल्तानपुरी ने ठीक ही कहा है, “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।” शायद आज के समय में यह शे’र इन महिलाओं पर फिट बैठता है। लेकिन सिर्फ अकेले ही जीवन जीना, विवाह को नकारने का कारण नहीं है, कई अन्य पहलू भी हैं, जिन पर गौर करने की आवश्यकता है, ताकि आप यह जान सकें कि आखिर आज युवतियों का रुझान विवाह के प्रति कम क्यों हो रहा है!