कौन कहता है कि महिलाएं कमजोर होती हैं। मैरी कोम, मीरा बाई चानू का नाम सुनते ही महिलाओं को कमजोर कहने वालों की आंखें खुल जानी चाहिए। महिलाएं न मानसिक और न ही शारीरिक तौर पर कमजोर होती हैं। बल्कि महिलाएं तो इतनी मजबूत और ताकतवर होती हैं कि अपनी बल शक्ति से देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन्हीं दमदार महिलाओं में एक नाम है जमुना बोरो का। जमुना बोरो भारतीय महिला मुक्केबाज हैं। वर्तमान में 54 किलोग्राम वर्ग में भारत की नम्बर वन मुक्केबाज विश्व रैंक में टॉप 5 में शामिल हैं। इतनी बड़ी उपलब्धि जमुना बोरो के नाम है लेकिन क्या आपको पता है कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जमुना बोरो को कितना संघर्ष करना पड़ा? उन्होंने एक ऐसा खेल चुना, जिसे लेकर उन्हें ये कह कर डराया जाता था कि मुक्के से अगर उनकी सूरत बिगड़ गयी तो शादी तक नहीं होगी। इन सब के बावजूद जमुना डरी नहीं बल्कि अपने सपने को पूरा करने के लिए लड़ी। मुक्के खाए भी और लगाए भी । रिश्तेदारों की बातें सुनी, दर्द सहा, कड़ी मेहनत की और बन गईं देश की सबसे बड़ी महिला बॉक्सर जमुना बोरो। आज हम आपको जमुना बोरो के बॉक्सर बनने की कहानी बताने जा रहे हैं।