एक दूसरे के विरोधी कहे जाने वाले सतीश पूनिया और वसुंधरा राजे साथ आए थे नजर।
- फोटो : सोशल मीडिया
4. वसुंधरा ने दिल्ली के चुनिंदा पत्रकारों से की चर्चा
राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक को कवर करने आए दिल्ली के चुनिंदा पत्रकारों से वसुंधरा ने होटल की लॉबी में बातचीत की। वसुंधरा के आने से पहले जब उनका स्टाफ अरेंजमेंट में लगा था तो बीजेपी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ने पत्रकारों के वहां होने पर आपत्ति भी जताई। गरमागरमी भी हुई, पर सबकुछ संभल गया। वसुंधरा के मीडिया सलाहकार महेंद्र भारद्वाज को यह तक कहना पड़ा कि मैडम पार्टी की उपाध्यक्ष हैं। यह मेरा कमरा है और होटल में किसी गेस्ट को कहीं आने-जाने से नहीं रोका जा सकता। इससे ऐसा लगा कि वसुंधरा पत्रकारों के जरिए दिल्ली तक संदेश पहुंचाना चाहती है। खैर, मामला रफा-दफा हो गया। वसुंधरा ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि राजस्थान में चुनाव कभी भी हिंदू-मुसलमान के मुद्दे पर नहीं हुआ, बल्कि जातीय समीकरणों पर हुआ है। जोधपुर समेत अन्य शहरों की घटनाओं पर चिंता जताई। अशोक गहलोत से दोस्ती से जुड़े सवालों पर घोटाले के आरोपों का हवाला देकर पल्ला झाड़ा।