फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kabir Yatra: शबनम वीरमानी बोलीं- राम सिर्फ दशरथ के बेटे नहीं, परंपरा और जीने का तरीका हैं, देखें तस्वीरें

Fri, 20 May 2022 05:18 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
विज्ञापन
1 of 6
भीलवाड़ा में हुआ शबनम वीरमानी की कबीर यात्रा का कार्यक्रम। - फोटो : सोशल मीडिया
शबनम वीरमानी की कबीर यात्रा का कार्यक्रम भीलवाड़ा के अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित किया गया। गौसेवा परिवार की ओर से आयोजित इस कबीर यात्रा में हजारों लोगों ने पहुंचे। शबनम के सुरीले संगीत के बीच करीब ढाई घंटे तक खचाखच भरा पांडाल कबीर यात्रा का आनंद लेता रहा। इस दौरान केजी कदम ने शबनम को एक स्केच भी भेंट किया।
विज्ञापन

2 of 6
कार्यक्रम में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
शबनम विरमानी ने हाथ में पांच तारों वाला तंबूरा लेकर कबीर के विचारों वाले लोकगीतों को सुरों के मोतियों में पिरोया तो पांडाल में बैठा हर व्यक्ति झूमने लगा। उन्होंने अपने भजन की शुरुआत कबीर के दोहे से की और उसका अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा, दुनिया केवल दशरथ के बेटे राम तक उलझ कर रह जाती है, जबकि राम तो घट-घट में विराजमान हैं। भगवान राम परंपरा हैं...राम जीवन जीने का तरीका हैं।
विज्ञापन

3 of 6
भजन सुनकर झूम उठे श्रोता। - फोटो : सोशल मीडिया
कबीर यात्रा के कार्यक्रम में उन्होंने राम बिना रे कोई धाम नहीं..., सकल हंस में राम बिराजे..., सब ब्रह्माण्ड में जोत का बासा...,राम को सुमिरो दूजा नहीं..., तीन गुण पर तेज हमारा..., पांच तत्व पर जोत जले..., जिनका उजाला चैदह लोक में... और सूरत डोर आकाश चढ़े सहित कई भजन सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

4 of 6
करीर के भजन सुनने के लिए उमड़े लोग। - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि शबनम विरमानी ‘द कबीर प्रोजेक्ट’ के जरिए कबीर के विचारों को लोगों को पहुंचाने का काम कर रही हैं। राजस्थान यात्रा और मालवा यात्रा के सफल प्रयोग के बाद शबनम विरमानी देशभर में कबीर के विचारों को जीवंत कर रही हैं। शबनम विरमानी एक फिल्म निर्माता और बेहद ही उम्दा गायक हैं। उनकी फिल्मों को कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।
विज्ञापन

5 of 6
केजी कदम ने शबनम को स्केच भेंट किया। - फोटो : सोशल मीडिया
शबनम कहती हैं कि, 15वीं शताब्दी के संत कबीर ने हिंदू, मुस्लिम, सिख और सभी को अपने विचारों से प्रभावित किया। उन्होंने कहा, ईश्वर न कैलाश में हैं और न काबा में, वह तो घट-घट में विराजमान हैं। कबीर की संपत्ति उनके दोहे उनके विचार और उनकी वाणी है। जिसे कभी किसी किताब में नहीं उतारा गया। कबीर के विचारों को लोगों ने गाकर और किस्सागोई करके वर्षों तक जीवित रखा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल हुई महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
संगीत को लेकर शबनम बताती हैं कि मेरे पिता को संगीत का बहुत शौक था। वह खुद भी गाया करते थे। मैंने 11 साल की उम्र में ही उन्हें खो दिया था। उसके जरिए मेरा संगीत के प्रति लगाव लगाव बहुत गहरा हो गया। हम साथ में हिंदी फिल्मी गाने और गजल गाते थे। उन्होंने मुझे हारमोनियम दिलवाया और शास्त्रीय संगीत सीखने को कहा था। मैंने कॉलेज में कुमार गंधर्व के एक शिष्य से संगीत सीखा था। तब से शुरू हुआ मेरा संगीत का सफर आज तक जारी है।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें