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Rajasthan By-Election: कौन दे रहा किसको टक्कर, किस सीट पर सहानुभूति का दांव, जानिए सात सीटों का सियासी समीकरण

Thu, 24 Oct 2024 10:48 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान

सार

Rajasthan By-Election: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने सभी सात सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। 23 अक्तूबर को कांग्रेस ने सूची जारी की, जबकि भाजपा ने 20 अक्तूबर को छह सीटों के लिए नाम घोषित किए थे। 13 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए दोनों पार्टियां पूरी तैयारी में हैं। 
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उपचुनाव के लिए दोनों पार्टियों ने कसी कमर। - फोटो : अमर उजाला
Rajasthan By-Election: राजस्थान विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने सभी सात सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। 23 अक्तूबर को कांग्रेस ने सूची जारी की, जबकि भाजपा ने 20 अक्तूबर को छह सीटों के लिए नाम घोषित किए थे। 13 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए दोनों पार्टियां पूरी तैयारी में हैं। राजस्थान विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा के बाद अब कांग्रेस ने सभी सातों सीट पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। हालांकि भाजपा ने अभी तक 6 नाम ही घोषित किए हैं। चौरासी सीट पर अभी कोई चेहरा भाजपा ने सामने नहीं किया है। वहीं कांग्रेस ने सातों सीटों पर मुकाबले के लिए चेहरे सामने कर दिए हैं। बुधवार 23 अक्तूबर देर रात कांग्रेस ने उपचुनावों के लिए अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। वहीं भाजपा ने 20 अक्तूबर को ही घोषणा कर दी थी।



राजस्थान में 13 नवंबर को उपचुनाव के लिए वोटिंग होगी। इसके लिए दोनों ही पार्टियों ने कमर कस ली है। फिलहाल तो 6 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा का आमने-सामने का मुकाबला तय हो चुका है। हालांकि इनमें से कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। बीएपी चौरासी के साथ सलूंबर में भी चुनाव लड़ रही है। वहीं, गठबंधन के इंतजार में बैठी आरएलपी भी अब खींवसर के अलावा अन्य कुछ सीटों पर भी अपने प्रत्याशी उतार सकती है।
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इन सीटों पर भाजपा-कांग्रेस का सीधा मुकाबला

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कांग्रेस के केसी मीणा और भाजपा के राजेंद्र गुर्जर। - फोटो : अमर उजाला
देवली-उनियारा 
कांग्रेस प्रत्याशी: यहां कांग्रेस ने केसी मीणा को उतारा है। हाल में इन्होंने वीआरएस लिया था। कांग्रेस सांसद हरीश मीणा ने इनके टिकट के लिए लॉबिंग की थी। 
भाजपा प्रत्याशी: इस सीट पर भाजपा ने अपने पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह गुर्जर को फिर से मौका दिया है। साल 2018 के विधानसभा चुनावों में राजेंद्र सिंह गुर्जर यहां भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते। 2023 में भाजपा ने उनका टिकट काटकर विजय बैंसला को दिया। विजय कांग्रेस के प्रत्याशी हरीश मीणा से चुनाव हार गए। अब उपचुनाव में भाजपा ने फिर से राजेंद्र गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। 
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रामगढ़ सीट

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कांग्रसे के आर्यन जुबेर खान और भाजपा के सुखवंत सिंह। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस प्रत्याशी: रामगढ़ से आर्यन जुबैर को कांग्रेस ने मैदान में उतार है। रामगढ़ सीट के भूतपूर्व विधायक जुबैर खान के छोटे बेटे हैं आर्यन जुबैर।
भाजपा प्रत्याशी: इस सीट पर भाजपा ने दशकों बाद आहूजा परिवार के बाहर टिकट दिया है। पिछले विधानसभा चुनावों में सुखवंत सिंह भाजपा से बागी होकर आजाद समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और 74 हजार से ज्यादा वोट लेकर दूसरे नंबर रहे थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी जय आहूजा तीसरे नंबर रहे थे।

दौसा सीट

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कांग्रेस से डीडी बैरवा और भाजपा से जगमोहन मीणा। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस प्रत्याशी: कांग्रेस ने दौसा सीट से डीडी बैरवा को उतारा है। इनकी पत्नी बीना बैरवा वर्तमान में लवाण पंचायत समिति की प्रधान हैं, जबकि स्वयं जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव हैं।
भाजपा प्रत्याशी: भाजपा ने यहां किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन को अपना प्रत्याशी बनाया है। जगमोहन को टिकट दिलावाने के लिए किरोड़ी लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। पिछले विधानसभा चुनावों में भी जगमोहन का टिकट एन वक्त पर कट गया था।
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यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार 

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कांग्रेस से डॉ. रतन चौधरी और भाजपा से रेवंत राम डागा। - फोटो : अमर उजाला
खींवसर सीट
कांग्रेस प्रत्याशी: खींवसर से डॉ. रतन चौधरी को कांग्रेस ने उतारा है। पूर्व आईपीएस सवाई सिंह की पत्नी हैं। ज्योति मिर्धा के साथ ही इन्होंने भी भाजपा ज्वाइन की थी।
भाजपा प्रत्याशी: बीजेपी ने 2023 के विधानसभा चुनावों में भी रेवंत राम डागा को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन हनुमान बेनीवाल के सामने वे बेहद नजदीकी मुकाबले में चुनाव हार गए। अब उपचुनावों में भाजपा ने एक बार फिर से यहां अपना डागा को मैदान में उतार दिया है।
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सलूंबर सीट

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कांग्रेस से रेशमा मीणा और भाजपा से शांता देवी। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस प्रत्याशी: कांग्रेस ने यहां रेशमा मीणा को मौका दिया हौ। कांग्रेस ने रघुवीर मीणा की जगह रेशमा को टिकट देकर चौंका दिया है। जयसमंद पंचायत समिति सदस्य रेशमा ने डबल एमए कर रखा है। 53 साल की रेशमा मीणा सराड़ा पंचायत समिति में पहले दो बार प्रधान रह चुकी हैं।
भाजपा प्रत्याशी: सलूंबर में भाजपा ने सहानुभूति की लहर का फायदा लेने के लिए अपने दिवंगत विधायक अमृत लाल मीणा की पत्नी शांता देवी को प्रत्याशी बनाया है। अमृत लाल मीणा का इसी साल सितंबर में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।
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झुंझुनूं सीट

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कांग्रेस से अमित ओला और भाजपा से राजेंद्र भांबू। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस प्रत्याशी: कांग्रेस ने यहां से अमित ओला पर दांव खेला है। अमित गहलोत सरकार के पूर्व मंत्री तथा झुंझुनू लोकसभा सीट से सांसद बृजेंद्र ओला के बेटे हैं।
भाजपा प्रत्याशी: भाजपा ने झुंझुनूं से राजेंद्र भांबू को उपचुनाव में अपना प्रत्याशी घोषित किया है। झुंझुनूं से राजेंद्र भांबू जब 2018 में भाजपा के उम्मीदवार थे, लेकिन 2023 में इनकी जगह निशीत कुमार उर्फ बबलू को टिकट दिया गया। बबलू चुनाव हार गए। इसलिए भाजपा ने एक बार फिर से राजेंद्र भांबू को मैदान में उतारा है।
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चौरासी सीट

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कांग्रेस से महेश रोत और भाजपा ने सीट होल्ड की। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस प्रत्याशी: कांग्रेस ने इस सीट से महेश रोत को मौका दिया है। महेश यूथ कांग्रेस का अहम हिस्सा हैं। छात्रसंघ राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
भाजपा प्रत्याशी: डूंगरपुर-बांसवाड़ा की चौरासी सीट के लिए भाजपा ने टिकट होल्ड पर रखा हुआ है। भाजपा की ओर से अभी इस सीट पर कोई चेहरा सामने नहीं है। कांग्रेस के महेश रोत को टक्कर देने के लिए भाजपा किसको सामने लाती है ये देखना दिलचस्प होगा।

इसलिए जरूरी हुए उपचुनाव
बता दें कि दो सीटों पर तो उपचुनाव मौजूदा विधायकों कांग्रेस के जुबैर खान (रामगढ़) और भाजपा के अमृतलाल मीना (सलूंबर) के निधन के कारण हो रहे हैं। बाकी पांच सीटों पर विधायक लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए थे, जिसके कारण उपचुनाव की जरूरत पड़ी। वर्तमान में 200 सीटों वाली राज्य विधानसभा में भाजपा के 114 विधायक, कांग्रेस के 65, भारत आदिवासी पार्टी के तीन, बसपा के दो, रालोद का एक और आठ निर्दलीय विधायक हैं।

ये चुने गए सांसद
कांग्रेस विधायक बृजेंद्र ओला (झुंझुनू), हरीश चंद्र मीना (देवली-उनियारा), मुरारी लाल मीना (दसाऊ), राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के विधायक हनुमान बेनीवाल (खींवसर) और भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक राजकुमार रोत (चोरासी) इस साल लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए थे। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव की तरह उपचुनाव के लिए किसी क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया है।
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