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Rajasthan: एक ऐसा मंदिर जहां भगवान को भक्त बनाते हैं बिजनेस पार्टनर, मन्नत का चढ़ावा जानकर हैरान रह जाएंगे

Tue, 04 Feb 2025 05:00 AM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़

सार

देश भर में कई मंदिर हैं और सभी मंदिरों की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि भक्त भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर बनाते हैं और यहीं नहीं बिजनेस में तय हिस्सा भी भगवान को देते हैं। वहीं, एक भक्त ने अपनी मन्नत पूरी होने पर चांदी का नलकूप भेंट किया है।
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सांवलिया सेठ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले के प्रख्यात कृष्णधाम श्री सांवलिया जी मंदिर की ख्याति देश और दुनिया तक जा रही है। देश के हर राज्य से और विदेशों से भी भगवान कृष्ण के भक्त दर्शन के लिया आते हैं। भगवान सांवलिया सेठ श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। साथ ही बिजनेस में भी मुनाफा होता है।

यही कारण है कि हर महीने खुलने वाले सांवलिया सेठ के भंडार से करोड़ों रुपये का नकद चढ़ावा के अलावा सोने और चांदी के आभूषण भी चढ़ाते हैं। वहीं, एंटीक वस्तुएं भी भेंट में आती हैं, जो काफी महंगी भी होती हैं। किसी ने व्यवसाय तो किसी ने खेती तो किसी ने नौकरी के लिए मनोकामना मांगी। कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं, जिन्होंने बीमारी से बचाव और परिवार वृद्धि के लिए मनोकामनाएं मांगी तथा पूरी भी हुई है। ऐसे में हर महीने लाखों श्रद्धालु दर्शनार्थ आ रहे हैं। गत दिनों ही मेलों में रावण बनाने वाले ठेकेदार ने चांदी से बना दशानन भेंट किया। वहीं, सोमवार को ही एक व्यक्ति ने चांदी से बना नलकूप भेंट किया है।
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सांवलिया सेठ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
जानकारी में सामने आया कि जिले के प्रख्यात कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर की ख्याति दिन दोगनी रात चौगुनी गति से बढ़ रही है। अब सामान्य दिनों में भी भारी भीड़ रहने लगी है। वहीं, श्रद्धालु मनोकामनाएं पूरी होने पर नकदी, आभूषण, एंटीक वस्तुएं, विदेशी मुद्रा आदि भेंट करते हैं।
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सांवलिया सेठ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
किसान ने भगवान को नलकूप भेंट किया 
सांवलियाजी मंदिर में सोमवार को मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित कटारिया खेड़ा निवासी प्रहलाद सिंह पुत्र निलेश सिंह पेशे से किसान है। इसका परिवार भी खेती पर ही आधारित है। सिंचाई को लेकर पानी की आवश्यकता हुई तो उन्होंने नलकूप खुदवाने का निर्णय किया। इन्होंने बोरवेल मशीन मंगवाई और एक के बाद एक कर के पांच नलकूप खुदवाए। लेकिन एक में भी पानी नहीं आया। इस पर इसने भगवान सांवलिया सेठ से मन्नत मांगी थी। इसके बाद छठा नलकूप खुदवाया तो उसमें भरपूर पानी आ गया। इस पर अपनी मनोकामना पूरी होने पर चांदी का नलकूप बनवाया। करीब 119 ग्राम चांदी का नलकूप किसान ने भगवान को भेंट किया।

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चढ़ावा - फोटो : अमर उजाला
इसमें बैट्री सिस्टम भी है, जिससे कि पानी भरने और मोटर चलाने पर चांदी के नलकूप से पानी भी निकलता है। सोमवार सुबह प्रहलाद सिंह चांदी नलकूप लेकर मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर प्रभारी राजेंद्र शर्मा के साथ भगवान को नलकूप चढ़ाया। मंदिर प्रभारी शर्मा ने बताया कि भगवान सांवलिया सेठ के मंदिर में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। बिजनेस में पार्टनर भी बनाते हैं। मनोकामनाएं पूरी होने पर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं तथा व्यापार में मुनाफा होने पर लाखों रुपये की नकदी चढ़ाते हैं।
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मंदिर में चढ़ावा - फोटो : अमर उजाला
गुजरात और महाराष्ट्र के बड़े श्रद्धालु, बनाते हैं पार्टनर
एक समय था जब श्री सांवलियाजी मंदिर में दर्शन के लिए मेवाड़, मालवा व हाड़ौती (राजस्थान व मध्यप्रदेश) के श्रद्धालु अधिक आते थे। लेकिन मंदिर की ख्याति बढ़ी और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हुई तो श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी है। अब गुजरात और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, जो कि व्यवसाय से जुड़े हैं। 

ऐसे में श्रद्धालु भगवान को बिजनेस पार्टनर बनाने लगे हैं। बिजनेस में जो मुनाफा होता है, उसमें से प्रतिशत भगवान को भेंट चढ़ाते हैं। श्री सांवलिया मंदिर बोर्ड के सदस्य संजय मंडोवरा ने बताया कि भगवान श्री सांवलिया सेठ की ख्याति बढ़ी है। ऐसे में कई राज्यों के श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शनार्थ आने लगे हैं। मनोकामनाएं पूरी होने पर भगवान को भेंट भी चढ़ाते हैं।
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मंदिर में आया चढ़ावा - फोटो : अमर उजाला
अक्षरधाम की तर्ज पर बना हुआ है मंदिर
श्री सांवलियाजी मंदिर में भगवान की प्रतिमा वर्षों पुरानी है। वहीं, यहां श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर विस्तार का निर्णय किया गया। इस मंदिर का निर्माण अक्षरधाम की तर्ज पर ही किया गया है।
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मंदिर में आया चढ़ावा - फोटो : अमर उजाला

भंडार और भेंट कक्ष में मिलाकर आया करीब 23 करोड़ का चढ़ावा
सांवलियाजी मंदिर में खोले गए भंडार से चढ़ावा राशि की गणना सोमवार को पांचवें चरण में हुई है। इसमें भंडार व भेंट कक्ष में मिला कर करीब 23 करोड़ रुपये की चढ़ावा राशि प्राप्त हुई है। इसके अलावा भंडार एवं भेंट कक्ष से सोने एवं चांदी के आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। वहीं, भंडार से निकले सिक्कों का वजन करना शेष है, जो कि मंगलवार को होगा। भंडार की गणना के दौरान मंदिर बोर्ड के पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे हैं।

जानकारी में सामने आया कि गत 28 जनवरी को भगवान श्री सांवलिया सेठ का भंडार खोला गया था। इसके चौथे चरण की गणना तक 16 करोड़ 32 लाख 05 हजार रुपये प्राप्त हुए। वहीं, पांचवें चरण की गणना सोमवार को हुई। इसमें 67 लाख 54 हजार 900 रुपये प्राप्त हुए। साथ ही मंदिर कार्यालय के भेंट कक्ष ऑनलाइन से मिलाकर 05 करोड़ 92 लाख 53 हजार 417 रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा भण्डार एवं आनलाइन कार्यालय दोनों की राशि 22 करोड़ 92 लाख 13 हजार 317 रुपये पहुंची है। वहीं, भंडार से जो सिक्के चढ़ावे के रूप में आए हैं, उनका वजन मंगलवार को होगा।

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गणना करते हुए - फोटो : अमर उजाला

सोमवार को भंडार की गणना के दौरान मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष भैरूलाल गुर्जर, सदस्य संजय कुमार मण्डोवरा, अशोक शर्मा, ममतेश शर्मा, भैरूलाल सोनी, लेखाधिकारी राघव शर्मा, प्रशासनिक अधिकारी नंदकिशोर टेलर, संस्थापन अधिकारी लेहरीलाल गाडरी, मंदिर प्रभारी राजेंद्र शर्मा, सुरक्षा प्रभारी भेरूगिरी गोस्वामी, सहायक सुरक्षा प्रभारी बिहारीलाल गुर्जर, सम्पदा विभाग श्रवण शर्मा, राधेश्याम अहीर एवं कई बैंकों के कर्मचारी और मंदिर मंडल कर्मचारी उपस्थित रहे।

सोने और चांदी के आभूषण भी निकले
भंडार और भेंट कक्ष में सोने एवं चांदी के आभूषण भी प्राप्त हुए हैं। मंदिर कार्यालय से 168 ग्राम 640 मिली ग्राम सोना तथा 80 किलो 657 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है। वहीं, भंडार से 497 ग्राम सोना तथा 52 किलो 997 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है।

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