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इस एक्स प्रिंसेज ने की थी लव मैरिज, झेला था विरोध, अब हैं ये MLA

Fri, 31 Mar 2017 04:28 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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महल से विधानसभा का सफर
एमएलए दीया कुमारी के लिए महल से विधानसभा का सफर आसान नहीं था। पूर्व जयपुर राजघराने की इस पूर्व राजकुमारी ने सवाई माधोपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गईं। उनका वैवाहिक जीवन भी चर्चित रहा है।
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शादी से समाज हुआ था नाराज

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पति के साथ दीया कुमारी
दीयाकुमारी की शादी अगस्त 1997 में हुई थी। शादी के साथ ही एक विवाद भी शुरू हुआ। उन्होंने नरेंद्र सिंह से प्रेम विवाह किया था। विवाद इसलिए हुआ कि दोनों एक ही गोत्र के थे। इसे लेकर राजपूत समाज में एकबारगी तो आक्रोश भी नजर आया। सगोत्री शादी को लेकर खिलाफत भी शुरू हुई, लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रहीं।
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भरापूरा है इनका परिवार

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दीया कुमारी परिवार के साथ
शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए। उनके पहली संतान बेटा हुआ। 2 जुलाई 1998 को पद्मनाभ ने जन्म लिया। पद्मनाभ पूर्व महाराजा भवानी सिंह द्वारा 22 नवम्बर 2002 को उनका युवराज घोषित किया गया और 27 अप्रैल 2011 को जयपुर की गद्दी पर विराजमान हुए। इसके बाद दूसरा पुत्र लक्ष राज सिंह है और उनकी पुत्री गौरवी कुमारी हैं।

 

मोदी की मौजूदगी में ली बीजेपी की सदस्यता

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दीया कुमारी नरेंद्र मोदी के साथ
दीया कुमारी ने राह चुनी राजनीति की। अपनी दादी पूर्व राजमाता गायत्री देवी की तरह ही उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। दीया कुमारी ने हाथ थामा भाजपा का। सितम्बर 2013 में  जयपुर में हुई रैली के दौरान भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस रैली में वर्तमान प्रधानमंत्री व गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे समेत कई नेता मौजूद थे।

 
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रोटी बेली भी, खाई भी

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चुनाव प्रचार के दौरान
इसके बाद दीया कुमारी को भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला। उन्होंने खूब मेहनत की और सीट के साथ ही लोगों का दिल जीतने में भी कामयाबी पाई। वे जहां आम जनता के साथ खेतों में फावड़े चलाती दिखीं तो रोटी बेलती भी नजर आईं। वहीं लोगों के साथ खाना भी खाया।
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सैलानियों को रंगने में नहीं रहती पीछे

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रंग से सराबोर दीया कुमारी
राजनीति हो या पुराने रिवाज वे हर जगह सक्रिय भूमिका निभाती नजर आती हैं। सिटी पैलेस की होली अपने आप में खास होती है। खास तौरपर धुलंडी के दिन पर्यटक पूर्व राजपरिवार के साथ होली खेलते हैं। दीया उस समय भी सक्रिय भागीदारी निभाती हैं। उनकी मौजूदगी रंग और गुलाल से सराबोर सैलानियों का उत्साह बढ़ा देती है।
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खूब लड़ाए पेंच भी

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पतंग उड़ाते दीया कुमारी
मकर संक्रांति पर भी सिटी पैलेस में सैलानियों का खासा जमावड़ा रहता है। जयपुर के पुराने शहर में पतंगबाजी का अपना अलग मजा है। सैलानियों व अपने परिवार के साथ दीया कुमारी पतंगबाजी भी करती नजर आती हैं।

 
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पूरी आस्था के साथ जुड़ी हैं परम्पराओं से

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तीज माता की पूजा करते हुए
जयपुर की तीज और गणगौर की प्रसिद्धी दुनिया भर में है। तीज माता की सवारी की शुरुआत पूर्व राजपरिवार की पूजा से ही होती है। वे इस परम्परा को पूरी आस्था के साथ निभाती हैं। तीज माता की पूजा करती नजर आती हैं।

 
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