राजस्थान का वागड़ क्षेत्र अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। यहां होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि साहस, उमंग और सामाजिक समरसता का पर्व बनकर आता है। जलते अंगारों पर नंगे पांव चलने से लेकर पत्थरों और टमाटरों की राड़ तक, वागड़ की होली हर किसी को अचंभित कर देती है।
ढूंढोत्सव: नवजात शिशु के लिए मंगलकामना
होली के अवसर पर वागड़ क्षेत्र में ढूंढोत्सव मनाने की परंपरा है। परिवार में नवजात शिशु की पहली होली पर उसे माता-पिता के साथ होलिका दहन स्थल पर ले जाया जाता है। यहां विधिवत पूजन और होलिका की परिक्रमा करवाई जाती है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से शिशु निरोगी और दीर्घायु होता है।