पुलिस और प्रशासन ने गांव में पहुंचकर शुरू की छानबीन
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प्रशासन की सुस्ती और ग्रामीणों का गुस्सा
सबसे ज्यादा लोगों की मौत 28 अप्रैल को हुई, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी उसी दिन देर शाम गांव पहुंचे। उससे पहले हुई मौत को लेकर किसी प्रकार की कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। प्रशासन की इस लापरवाही से ग्रामीणों में गहरा रोष है।
गांववासियों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार बेधड़क जारी था। ग्रामीणों ने बताया कि एक ठेकेदार को एक शराब दुकान की अनुमति मिली थी, लेकिन उसने कई अवैध दुकानें खोल रखी थीं, जहां कच्ची और जहरीली शराब खुलेआम बेची जा रही थी।