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Farmers Protest: राजस्थान में 29 जनवरी को किसानों का गांव बंद आंदोलन, 45 हजार गांवों के लोग करेंगे समर्थन

Mon, 20 Jan 2025 08:48 AM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

किसान आंदोलन को प्रदेश के 45,537 गांवों तक ले जाने की तैयारी हो रही है। किसान महापंचायत ने 29 जनवरी को प्रदेश में गांव बंद का एलान कर दिया है।
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किसान नेता रामपाल जाट - फोटो : अमर उजाला

किसान आंदोलन एक बार फिर से सक्रिय होता नजर आ रहा है। किसान महापंचायत ने राजस्थान में 29 जनवरी को गांव बंद का एलान कर दिया है। आंदोलन की तैयारी को लेकर रविवार को अलवर के हरसोली में किसान महापंचायत आयोजित की गई। इसमें 21 जिलों के किसान हुए एकजुट हुए। किसान महापंचात के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने बताया कि किसान नेता गांव-गांव जाकर किसानों से समर्थन मांग रहे हैं। गांव बंद आंदोलन में गांव का उत्पाद गांव से बाहर नहीं जाएगा। 



रामपाल जाट ने बताया कि आंदोलन को 26 जिलों के किसानों का समर्थन मिल चुका है। वहीं, अन्य जिलों के किसानों से गांव बंद आंदोलन के लिए संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब समेत कई राज्यों में किसान विभिन्न मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब किसानों ने गांव बंद आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए किसान गांव-गांव घूम रहे हैं और गांव बंद आंदोलन के लिए किसानों से समर्थन की मांग कर रहे हैं।

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किसान - फोटो : अमर उजाला
गांव से बाहर नहीं जाएगा गांव का उत्पाद
गांव बंद आंदोलन के दौरान के किसान अपने उत्पाद को बेचने के लिए गांव से बाहर नहीं जाएगा। यदि गांव में आकर कोई व्यापारी उत्पाद खरीदना चाहे तो उस पर रोक नहीं रहेगी। रामपाल जाट ने बताया कि राजस्थान के सभी 45,537 गांव में यह आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि गांव बंद के दौरान गांव का कोई भी व्यक्ति अपने उत्पाद को लेकर बाहर नहीं जाएगा। न ही वह रेलगाड़ी, बस या किसी वाहन का इस्तेमाल करेगा। हालांकि, आपातकालीन स्थिति में गांव बंद लागू नहीं होगा। मतलब आपातकालीन स्थिति में गांव के लोग आ जा सकेंगे। यह आंदोलन 45,537 गांव में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इस आंदोलन से किसानों को जोड़ने के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है।
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किसान नेता - फोटो : अमर उजाला
स्वेच्छा पर आधारित होगा आंदोलन
उन्होंने कहा कि गांव बंद स्वेच्छा पर आधारित होगा, जिसमें सत्य, शांति एवं अहिंसा के व्रत की पालना अपरिहार्य होगी। इसमें टकराव की सम्भावना न्यूनतम होने से द्वेष की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी वरन आपसी प्रेम एवं सद्भाव के आधार पर जन समर्थन प्राप्त किया जा सकेगा। इसका प्रमुख उदघोष "खेत को पानी-फ़सल को दाम" है। "खेत को पानी" के लिए सिंचाई परियोजनाएं प्राथमिकता से बनाने तथा "फ़सल को दाम" के लिए खराबे की क्षतिपूर्ति के साथ "न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी क़ानून" यथाशीघ्र बनाने संबंधी विषयों की प्रमुखता रहेगी। इसकी सफलता के लिए प्रदेश भर में जन जागरण चल रहा है।
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किसान नेता - फोटो : अमर उजाला
जन-जागरण के प्रथम चरण में भीलवाड़ा और चितौड़गढ़
किसान महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी ने बताया कि राजसमंद, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, पाली, ब्यावर, जयपुर, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड और दौसा सहित 20 जिलों में सम्पर्क किया गया।

जनजागरण के दूसरे चरण में टोंक, बारां, झालावाड़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, डीग, सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़, गंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, नागौर और डीडवाना सहित 18 जिले होंगे। शेष रहे धौलपुर, बालोतरा और सलूंबर जिलों का कार्यक्रम तीसरे चरण में रहेगा।
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