अटारी रोड स्थित बीएसएफ खासा हेडक्वार्टर की मेस में रविवार की सुबह रोज की तरह सामान्य ही थी। नाश्ते की तैयारी चल रही थी। ड्यूटी पर जाने से पहले सैनिक नाश्ता करने पहुंचे थे। मेजों कुर्सियों पर बैठकर आपस में बातें कर रहे थे। इस बात से अंजान कि अगले कुछ पलों में उनके साथ क्या गुजरने वाला है। करीब 9.30 बजे हाथ में रायफल लिए सतेप्पा वहां पहुंचा और अंधाधुंध गोलियां बरसाने लगा। पूरा कैंपस गोलियों की आवाज से गूंज उठा। किसी को कुछ समझ नहीं आया। बचने के लिए जवान इधर-उधर भागे। कुछ ने मेजों के नीचे छिपकर जान बचाई। इसके बाद वह कुछ समय के लिए रुका, फिर अपनी ही रायफल से खुद को भी गोली मार ली। गंभीर हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वह बच नहीं सका। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। साथ ही बीएसएफ कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी के भी भीतर जाने पर पाबंदी लगा दी। यहां तक कि मीडिया को भी दूर रखा गया।