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'डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं...', ये रहे अमिताभ के वो 15 डायलॉग

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'डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है'। अमिताभ का ये डायलॉग तो आपको याद ही होगा। अमिताभ बच्चन को एंग्रीयंग मैन का खिताब दिलाने में उनके डायलॉग का भी अहम स्थान है। उनकी डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों के दिल में जगह बनाने में खास काम किया। अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर उनके 15 सुपरहिट डायलॉग।
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'डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं...', ये रहे अमिताभ के वो 15 डायलॉग

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'जब तक बैठने के लिए ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो, ये पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं'। जंजीर (1973)
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'मैं आज भी फैंके हुए पैसे नहीं उठाता'। दीवार (1975)

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'तुम्हारा नाम क्या है बसंती'। शोले (1975)
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शहंशाह (1988) 'रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह'।
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'जाओ पहले उस आदमी के साइन लेकर आओ जिसने मेरे बाप को चोर कहा था, पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरी मां को गाली देकर नौकरी से निकाल दिया था, पहले उस आदमी का साइन लेकर आओ जिसने मेरे हाथ पे ये लिख दिया... ये। उसके बाद मेरे भाई, तुम जहां कहोगे मैं साइन करने को तैयार हूं।'  दीवार (1975)
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'हम कभी किसी के पीछे खड़े नहीं होते, जहां हम खड़े होते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है'। कालिया (1981)

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कुली (1983) 'बचपन से सिर पे है अल्लाह का हाथ और अल्लाह रक्खा है अपने साथ। बाजू पे है सात सौ छियासी का बिल्ला, बीस नंबर की बीड़ी पीता हूं, काम करता हूं कुली का और नाम है इकबाल। जिसके सिर पर हाथ पड़े बचे ना उसका एक भी बाल'।

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'विजय दीनानाथ चौहान, पूरा नाम। बाप का नाम दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान' गांव मांडवा, उम्र छत्तीस साल, नौंवा महीना, आठ दिन और ये सोलहंवा घंटा चालू है। अग्निपथ (1990)

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'मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं। तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता'। सिलसिला (1981)

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'ऐसा तो आदमी लाइफ में दोइच टाइम भागता है। ओलंपिक का केस हो, या पुलिस का केस हो'। अमर अकबर एंथोनी (1977)

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'मर्द को दर्द नहीं होता'। मर्द (1985)

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'मूंछे हों तो नत्थूलाल जैसी हों वरना ना हों'। शराबी (1984)

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'अरे ये जीना भी कोई जीना है लल्लू, हांय'। मिस्टर नटवरलाल (1979)
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'आनंद मरा नहीं, आनंद मरते नहीं'। आनंद (1971)
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