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राबड़ी देवी, चौथी पास महिला कैसे बनी बिहार की मुख्यमंत्री

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आजादी के बाद से बिहार की जनता कई बड़ी राजनीतिक घटनाओं की साक्षी बनी है। ऐसी ही एक घटना है एक ठेठ घरेलू महिला का अचानक बिहार की मुख्यमंत्री बन जाना।
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साल 1996 में जब लालू यादव का नाम अचानक चारा घोटाले में आया तो चौतरफा बने दबावों के बाद उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा। उनके राजनीतिक विरोधियों को लगा कि लालू का राजनीतिक कॅरियर अब खत्म होने की कगार पर है। लेकिन राजनीति के घाघ खिलाड़ी लालू यादव ने तभी ऐसा मास्टर स्ट्रोक चला कि हर कोई हतप्रभ रह गया। उन्होंने अपनी पत्‍नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया।
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महज चौ‌थी पास राबडी देवी के जिम्मे अचानक इतनी बड़ी जिम्मेदारी आ गई जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। लेकिन उन्होंने उसे इतनी ही शिद्दत से निभाया जितना परिवार को चलाने की जिम्मेदारी को।

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1956 को बिहार के गोपालगंज में जन्मी राबड़ी देवी की शादी लालू यादव से तब ही हो गई थी जब वो मात्र 14 साल की थीं।
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साल 1973 में जिस समय दोनों शादी के बंधन में बंधे उस दौरान लालू यादव छात्र राजनीति में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे थे।
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लालू यादव ने इसके बाद राजनीति में लंबा सफर तय किया और वो एक छात्र नेता से राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। इस दौरान जहां लालू यादव राजनीति की उधेड़बुन में व्यस्त रहे वहीं राबड़ी देवी नौ बच्चों के बड़े परिवार को संभालने में लगी रहीं।
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राजनीति में सबकुछ ठीक ठाक ही चल रहा था, इसी बीच 1997 में लालू यादव को अचानक मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी।

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इसके बाद बिहार की राजनीति में वो हुआ जो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। राजनीति के घाघ लालू यादव ने वो चाल चली जिसने उनके विरो‌धियों को धराशायी कर दिया। उन्होंने अपनी चौ‌थी पास पत्नी राबड़ी देवी के हाथ में राज्य की बागडोर दे दी।

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बिहार तो क्या देश की राजनीति में भी कभी पहले ऐसा नहीं हुआ था कि घर का कामकाज देखने वाली एक अल्प शिक्षित महिला अचानक सत्ता के शिखर तक जा पहुंची हो।

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लेकिन पति की तरह धुन की पक्की राबड़ी देवी ने इस जिम्मेदारी को भी पूरी तन्मयता से लिया और मुख्यमंत्री के साथ साथ परिवार की जिम्मेदारी को भी सहजता से संभाला।

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हालांकि‌ राबड़ी देवी के बारे में ये भी कहा जाता है कि सत्ता का असली रिमोट उनके पति लालू यादव के ही हाथ में रहा। लेकिन इसके बावजूद भी राबड़ी देवी की काबिलियत और सफलता से इंकार नहीं किया जा सकता।

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यही कारण रहा कि वो एक बार नहीं तीन बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी। उन्होंने लगभग छह साल तक बिहार की सत्ता संभाली।

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हालांकि राजनीति में उनकी पहचान उनकी मासूमियत के लिए भी थी। भोले से चेहरे वाली राबड़ी देवी मुश्किल से मुश्किल बात भी इतनी आसानी से कह जाती थीं कि सुनने वाले अचंभे में पड़ जाते थे।

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हालांकि साल 2005 में जेडीयू-भाजपा गठबंधन के हाथों चुनाव हारने के बाद राबड़ी देवी ने राजनीति को लगभग अलविदा ही कह दिया और दोबारा अपने बच्चों की परवरिश में जुट गईं।

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लेकिन कुछ दिन बाद ही साल 2010 में वो एक बार फिर सक्रिय राजनीति में वापस लौटी और राघोपुर सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन इस बार राजनीति उनके लिए इतनी सुलभ नहीं रही और वो जेडीयू के सतीश यादव के हाथों दस हजार वोटों से चुनाव हार गईं।
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इस बार के विधानसभा चुनावों में राबड़ी एक बार फिर पति लालू यादव के साथ कदम से कदम मिलाकर मैदान में हैं। लेकिन फर्क सिर्फ इतना ही है कि इस बार मुकाबला उनसे ही है जो कभी उनके साथ थे।
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