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Ujjain Mahakal Temple: इस बार 10 स्वरूपों में दर्शन देंगे महाकाल, भक्तों का उमड़ेगा सैलाब

Wed, 28 Jun 2023 03:59 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

इस साल सावन-भादौ में बाबा महाकाल की 10 सवारियां निकलेंगी। इसमें बाबा 10 स्वरूपों में दर्शन देंगे। सावन-भादौ में भक्तों का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। इसे देखते हुए खास इंतजाम किए गए हैं।  
 
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महाकाल सवारी - फोटो : अमर उजाला
सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। भोलेनाथ के भक्त जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और व्रत कर भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। हर तीन वर्षों में एक बार पुरुषोत्तम यानी की अधिक मास आता है लेकिन इस बार 19 वर्ष बाद संयोग बन रहा है जब यह अधिक मास सावन मास में आएगा। इस बार श्रद्धालु कुल 59 दिन तक भगवान भोलेनाथ की भक्ति कर पाएंगे। 

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालु उज्जैन मे विराजमान द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक बाबा महाकाल के दर्शन, पूजन और आशीर्वाद लेने पहुंचेंगे। सावन-भादौ में बाबा महाकाल अपनी प्रजा के हाल-चाल जानने नगर भ्रमण को निकलते हैं। इस बार बाबा महाकाल की 10 सवारियां निकलेंगी, और यह सिलसिला चार जुलाई से शुरू होगा। दो सावन मास होने से सावन सोमवारों की संख्या चार से बढ़कर आठ हो गई है। इसके बाद भादौ के पहले दो सोमवार भी भगवान महाकाल की सवारी निकलेगी। इस तरह इस बार भगवान महाकाल की कुल 10 सवारियां निकलेंगी। 

1985 में 10, 2004 में निकली थी 11 सवारियां
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि 19 वर्षों बाद यह महासंयोग आया है। सावन मास में अधिक मास आया है। इस कारण दो सावन माह होंगे। 1985 में सावन में अधिक मास होने पर बाबा महाकाल की 10 सवारियां निकाली गई थी। वर्ष 2004 में ऐसा ही संयोग बना था तो 11 सवारियां निकली थी। इस वर्ष भी परंपराओं का निर्वहन करते हुए राजाधिराज बाबा महाकाल की 10 सवारी निकाली जाएगी। 
 
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महाकाल के नौ स्वरूप - फोटो : अमर उजाला
सिंधिया शासन में निकली थी पहली सवारी 
उज्जैन के लोग भगवान महाकाल की अपना राजा मानते हैं। सवारी के दौरान जब भगवान महाकाल की पालकी नगर भ्रमण पर निकलती है तो ऐसा माना जाता है कि भगवान अपने भक्तों का हाल-चाल जानने भ्रमण कर रहे हैं। सिंधिया शासन के दौरान यह परंपरा शुरू हुई। रियासतकाल में उज्जैन पर सिंधिया राजवंश का शासन था। सिंधिया परिवार के विद्वानों ने भगवान और भक्तों की दूरी कम करने के लिए यह परंपरा शुरू की थी। इसने आज भव्य रूप ले लिया है। आज भी महाकाल की अंतिम सवारी में सिंधिया परिवार का कोई न कोई सदस्य बाबा महाकाल की आरती करने जरूर आता है।

पालकी, हाथी और रथ पर निकलेंगे महाकाल के स्वरूप 
हर वर्ष बाबा महाकाल की छह से सात सवारी निकाली जाती है। इस बार 10 सवारियां निकलेंगी, जिसके श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति ने एक माह पूर्व से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। इस बार सवारी में पालकी और हाथी के साथ आठ रथ शामिल होंगे। इन पर बाबा महाकाल के अलग-अलग स्वरूप प्रति सवारी में बढ़ते जाएंगे। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि पहली सवारी में हाथी पर भगवान मनमहेश निकलेंगे। दूसरी सवारी में हाथी पर भगवान मनमहेश तो पालकी मे भगवान चंद्रमौलेश्वर दर्शन देंगे। तीसरी सवारी में गरुड़ पर शिव तांडव स्वरूप, चौथी सवारी में नंदी पर भगवान महाकाल का उमा महेश स्वरूप, पांचवी सवारी में बैलगाड़ी पर होलकर स्वरूप, छठी सवारी में बैलगाड़ी पर घटाटोप स्वरूप, सातवीं सवारी में जटाशंकर स्वरूप, आठवीं सवारी में कोटेश्वर स्वरूप, नौवीं सवारी में सप्तधान स्वरूप दर्शन देंगे। दसवीं और अंतिम सवारी को शाही सवारी भी कहते हैं। इस दौरान सबी दस स्वरूप एक साथ भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर में बाबा महाकाल की सवारी के लिए पांच पुराने रथ तैयार हैं। इस बार सवारी की संख्या अधिक होने से दिल्ली, इंदौर और उज्जैन के दानदाताओं के सहयोग से तीन नए रथ बने हैं। 
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