उज्जैन में सबसे पहले महाकाल के आंगन मे रंगपंचमी मनाई गई। पंडे-पुजारियों ने महाकाल भगवान को टेसू के फूलों से बना रंग अर्पित किया। भस्मारती में रंग चढ़ाया। इसके बाद श्रद्धालुओं पर रंग डाला गया।
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महाकाल के आंगन में पहुंचे भक्त
- फोटो : सोशल मीडिया
विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में रंगपंचमी पर रंगों का उल्लास नजर आया। भगवान महाकाल को टेसू के फूलों का रंग चढ़ाया। गर्भगृह से नंदी हॉल तक केसरिया रंग उड़ाया गया। भस्मारती के दौरान भी बाबा महाकाल को प्राकृतिक रंग अर्पित किया और भक्तों पर रंग डाला गया।
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महाकाल के आंगन में नंदी पर चढ़ाया गुलाल
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल होली की ही तरह रंगपंचमी भी सबसे पहले महाकाल के आंगन में ही मनाई जाती है। तड़के भस्मारती से इसकी शुरुआत होती है। मंगलवार को भस्मारती में भगवान महाकाल को टेसू के फूलों से बना रंग चढ़ाया गया। भस्मारती में पहुंचे श्रद्धालुओं पर भी रंग डाला गया। पंडे-पुजारियों ने जमकर रंग खेला तो भक्त भी रंगों से सराबोर दिखे। महाकाल के आंगन में होली उत्सव के बाद शहरवासियों ने रंग पर्व की शुरुआत की। यहां रंग-तरंग की मस्ती में युवा रंग व गुलाल से होली खेलते नजर आए। शहर के हर मोहल्ले में लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर रंगपंचमी का पर्व मना रहे थे। कोरोना काल के दो साल बाद इस बार रंगपंचमी पर लोगों का उत्साह देखने लायक है। शाम को महाकाल मंदिर, सिंहपुरी, कार्तिक चौक तथा भागसीपुरा से पारंपरिक गेर निकाली जाएगी। श्रद्धालु बैंड बाजे व ढोल ढमाकों के साथ शौर्य व विजय के प्रतीक ध्वज निशान लेकर निकलेंगे।
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मंगलवार को भस्म आरती में महाकाल का श्रृंगार
- फोटो : सोशल मीडिया
रंगपंचमी पर सुबह ही टेसू के फूलों से रंग तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। करीब तीन से पांच क्विंटल टेसू के फूल मंगवाए गए थे। इन फूलों का रंग बनाकर महाकाल को अर्पित किया गया।
महाकाल के आंगन में जमकर खेली भक्तों ने रंगपंचमी
- फोटो : सोशल मीडिया
कोरोना के कारण जो भक्त दो साल से महाकाल के साथ रंग खेलने से वंचित थे, उन्होंने इस बार रंगपंचमी पर खूब रंग उड़ाया। परंपरा के अनुसार सबसे पहले पुजारियों ने बाबा महाकाल को टेसू के फूलों से बना रंग लगाया। आरती के दौरान रंग को श्रद्धालुओं पर फेंका। रंगपंचमी पर महाकाल का भांग, चंदन और सूखे मेवे से शृंगार किया गया। पंचामृत अभिषेक पूजन के बाद भस्म अर्पित की गई। त्रिनेत्र रूपी, मस्तक पर रजत त्रिपुण्ड और सिर पर शेषनाग रजत मुकुट धारण किया। रुद्राक्ष और फूलों की माला अर्पित की गई।