मध्यप्रदेश के कई गांवों में होली पर चूल चलने की परंपरा है। इसी के तहत उज्जैन जिले के उन्हेल क्षेत्र के कई गांवों में चूल समारोह हुआ। लोग नंगे पैर आग पर चले। दहकते अंगारों पर आस्था भारी रही। अन्य गांवों में भी इस परंपरा का निर्वाह किया गया।
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उन्हेल क्षेत्र के गांव में नंगे पर इस तरह आग पर चले लोग
- फोटो : सोशल मीडिया
आस्था के आगे विज्ञान विफल है। जब-जब बात आस्था की आती है तब-तब लोग परंपराओं का निर्वहन करते हैं और हर क्षेत्र में ये परंपराएं अलग होती हैं। होली पर ऐसी ही परंपरा मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में है जहां जलती हुई आग पर नंगे पैर चला जाता है। इसे चूल चलना कहते हैं और कई गांवों में आज भी इस परंपरा का निर्वहन हो रहा है।
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कम उम्र के बच्चे भी चले आग पर
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बात करते हैं उज्जैन जिले की जहां के कई गांवों में चूल चलना (चूल समारोह) की परंपरा जारी है। इस बार भी होली पर इस पंरपरा को निभाया गया। कहा जाता है कि मन्नत पूरी होने पर नंगे पैर जलती हुई आग और अंगारों पर चलते हैं। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं-युवतियां भी रहती हैं। बरसों से जारी परंपरा में अब तक किसी को किसी तरह का न नुकसान हुआ न ही कोई हादसा। दरअसल, उज्जैन के पास स्थित उन्हेल क्षेत्र के गांवों में यह परंपरा निभाई गई। उन्हेल के लालबाई फूलबाई माता मंदिर पर सैकड़ों ग्रामीणों ने अंगारों पर चलकर मन्नत मांगी। वहीं ग्राम देहटा, करनावद, ग्राम गुराडिया सांगा में भोलेनाथ मंदिर पर, आलोट जागीर के मलेश्वर महादेव मंदिर सहित पिपलिया डाबी में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नत पूर्ण होने पर दहकते अंगारों पर निकले।
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छोटे बच्चों को गोद में लेकर चले चूल पर
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके अलावा भी बड़नगर क्षेत्र के कुछ गांवों में भी लोग चूल चले। ग्रामीणों के मुताबिक चूल समारोह के लिए गांव में मंदिर के पास लंबा गड्ढा खोदा जाता है। पूजन के बाद उसमें लकड़ी जालते हैं और मंदिर के दीये से अग्नि प्रज्वलित करते हैं। इसमें घी भी डाला जाता है। इसके बाद इस आग से लोग नंगे पैर गुजरते हैं। जिसकी मन्नत पूरी होती है वह चूल पर चलता है।
चूल समारोह में बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
- फोटो : सोशल मीडिया
देवास में भी मन्नत पूरी होने पर चले अंगारों पर
इधर उज्जैन से लगे देवास जिले के कुछ गांवों में भी इस परंपरा को निभाया गया। देवास शहर से करीब 12 किमी दूर सियापुरा गांव में इस परंपरा का निर्वाह किया गया। मन्नत पूरी होने पर ग्रामीण कंडे के अंगारों पर चले। मेला भी लगा जिसमें सिन्नी, छोटा मालसापुरा, जनोली, राबड़िया, दुर्गापुरा, डूंगरिया, अमरपुरा, बड़ा मालसापुरा सहित कई गांव से लोग पहुंचे। इसी मेले में चूल का आयोजन किया गया, जिसमें मन्नतधारी अंगारे पर नंगे पैर चले। आयोजकों का कहना था कि अंगारों पर चलने से पहले गल महाराज की पूजा की जाती है। करीब 50 सालों से यह परंपरा चल रही है और मेला लगता आ रहा है। इसी मेले में लोग चूल पर चलते हैं।