इंदौर का सिरपुर तालाब रामसर साइट में शामिल हो चुका है लेकिन इसके बावजूद यहां की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। सिरपुर तालाब एक बार फिर से जलकुंभी से घिर गया है और निगम है कि हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। मप्र में रामसर साइट का गौरव सिरपुर को मिलने के बाद भी निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
क्यों खतरनाक है जलकुंभी
जलकुंभी को भारत में बंगाल का आतंक भी कहा जाता है। यह पौधा रुके हुए जल में वृद्धि करता है जो जल से ऑक्सीजन खींच लेता है। इस वजह से वहां की सारी मछलियां मर जाती हैं। यह एक बहुत तेजी से फैलने वाला खरपतवार है। यह जैव विविधता नुकसान का भी एक कारण है जो अनेक जलीय प्रजातियों को अपनी उपस्थिति के कारण नष्ट कर देता है। यह अल्प समय में ही संपूर्ण जल में फैल जाता है और उसे ढंक देता है इससे छुटकारा पाना बहुत कठिन होता है।
सिरपुर में क्यों आ रही परेशानी
सिरपुर तालाब में जलकुंभी बढ़ने के कई कारण हैं। निगम के पास आधुनिक मशीनें नहीं हैं जो जलकुंभी को तेजी से हटा सकें। अभी निगम पुरानी क्रेन और मशीनों से काम कर रहा है। प्रतिदिन दो मशीनों से जलकुंभी को साफ किया जाता है लेकिन उतनी ही तेजी से यह बढ़ जाती है। पर्यावरणविद् संदीप खानवलकर बताते हैं कि जलकुंभी बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण है सिरपुर में सीवरेज के पानी का मिलना। सिरपुर में आसपास की बस्तियों से कचरा और सीवरेज का पानी भी लगातार आता रहता है। इस वजह से जलकुंभी यहां पर तेजी से फैल रही है।
क्या है रामसर साइट
रामसर साइट वो जगह होती है जहां विलुप्त हो रही प्रजाति के पक्षियों और अन्य जीवों को संरक्षित किया जाता है। यदि झील या तालाब की स्थिति बेहतर रहती है तो यूनेस्को के द्वारा उसे रामसर साइट घोषित किया जाता है। इंदौर के सिरपुर तालाब को भी रामसर साइट में शामिल किया गया है। कुछ दिन पहले ही यहां पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि पहुंचे थे और सिरपुर की तारीफ की थी।