देवास कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने अमर उजाला से हुई बातचीत में कहा है कि आने वाले दस सालों में देवास की सूरत बदल जाएगी। यहां बड़ा इन्वेस्टमेंट जोन बनेगा। बड़े प्रोजेक्ट और बड़े उद्योग आएंगे। इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से विकास की रफ्तार बढ़ेगी।
किसी समय औद्योगिक शहर कहलाने वाला देवास बीच में औद्योगिक लिहाज से पिछड़ा। इंदौर से लगा होने के कारण विकास को भी तरसा मगर अब इस शहर के दिन बदल रहे हैं। क्या कुछ हो रहा है और क्या-क्या होने वाला है इसको लेकर देवास कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला ने अमर उजाला से बातचीत कर विचार साझा किए। करीब दो साल पहले चंद्रमौली शुक्ला बतौर कलेक्टर देवास में पदस्थ हुए थे। उनसे शहर के विकास और चुनौतियों के बारे में बातें हुईं तो बताया कि आने वाले सालों में देवास निवेश का बड़ा हब बनेगा। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-
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माता टेकरी पर निरीक्षण करते हुए कलेक्टर शुक्ला
- फोटो : सोशल मीडिया
देवास के विकास को लेकर क्या प्रयास हो रहे हैं और क्या कुछ बदलने वाला है ?
शुक्ला- देवास आने वाले समय में लगभग तीन हजार एकड़ का इन्वेस्टमेंट क्षेत्र बनने वाला है। बड़े उद्योग तेजी से आएंगे। निवेश की संभावना बढ़ेगी और रोजगार भी मिलेंगे। इसको लेकर तैयारियां चल रही हैं। अगले एक-दो सालों में कुछ बड़े प्रोजेक्ट आने वाले हैं। दस साल में देवास की सूरत एकदम बदल जाएगी। इंदौर की जगह देवास निवेश के लिए बेहतर विकल्प बनेगा।
आपको करीब दो साल होने को आए हैं। इन दो सालों में विकास के लिए क्या प्रयास किए ?
शुक्ला- विकास की कोशिश निरंतर की जा रही है। मेरे कार्यकाल की बात करूं तो मैंने पूर्व के अनुभवों से यहां एक दूरगामी विजन से काम किया है। शंकरगढ़ की पहाड़ी को लेकर बेहतर काम हुआ है। जहां कभी वीरानी थी अब वहां पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। इस पहाड़ी पर फिल्म सिटी का भी प्रस्ताव भेजा गया है। यह खास इसलिए भी है, क्योंकि इंदौर-भोपाल बायपास पर है और शहर से बाहर है। दूसरे शहरों के लोग भी यहां आएंगे जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा नए औद्योगिक क्षेत्र को लेकर काम हो रहा है। बायपास पर देवास विकास प्राधिकरण द्वारा मिनी सुपर कॉरिडोर की योजना है।
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नेमावर में मां नर्मदा को प्रणाम करते कलेक्टर शुक्ला
- फोटो : सोशल मीडिया
यातायात शहर की बड़ी समस्या है। इसे लेकर कोई कोशिश क्यों नहीं की गई ?
शुक्ला- ऐसा नहीं है। यातायात को लेकर हमेशा से कोशिश की जाती रही हैं, लेकिन बढ़ती आबादी और बढ़ते वाहनों के साथ सड़कें नहीं बढ़ पातीं, जिस कारण ऐसा लगता है। इसके लिए शहर में फ्लायओवर पर काम हो रहा है। एबी रोड पर इंदौर की तरफ और मक्सी रोड पर फ्लायओवर बन रहे हैं। मेंढकी रोड पर फ्लायओवर लगभग तैयार हो चुका है। उज्जैन रोड को फोरलेन में तब्दील किया जा रहा है। ये सब होने से यातायात का दबाव तो कम होगा ही, दूसरे शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी भी मिलेगी। शहर के विकास के लिए ये मील का पत्थर साबित होंगे।
माता टेकरी शहर की पहचान है। कुछ सालों से प्रशासन ने इस तरफ से मुंह मोड़ रखा है। इसको लेकर आप कुछ करेंगे ?
शुक्ला- माता टेकरी शहर की पहचान है यह सही है, मगर इससे मुंह मोड़ लिया गया यह सही नहीं है। माता टेकरी को लेकर हमने लगातार नवाचार किए हैं। हाल ही में रजतीकरण किया गया है। इससे टेकरी फोटोजेनिक हो गई है। चांदी से सजाया गया है। पहले जो अन्न क्षेत्र था उसे प्रसादालय में बदला गया है ताकि सभी को प्रसाद का लाभ मिले। महाकाल की तर्ज पर लड्डू प्रसादी आरंभ की। बड़ा द्वार बना रहे हैं। प्रवचन हॉल का निर्माण होगा। कुछ और भी योजनाएं हैं जिनको मूर्त रूप दिया जाएगा।
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हाल ही में सीएम शिवराज सिंह जिले के करोंदमाफी पहुंचे थे जहां कलेक्टर से उन्होंने कुछ विषयों पर बात की थी
- फोटो : सोशल मीडिया
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार सवाल उठते हैं। आखिर क्या वजह है कि सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं ?
शुक्ला- कभी कभार कुछ समस्या आती है जिनका समाधान किया जाता है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजी हॉस्पिटल में पहले से बेहतर हुई हैं स्वास्थ्य सेवाएं। कायाकल्प अभियान के तहत इस अस्पताल की सूरत बदली है। लोग यहां उपचार के लिए आते हैं और संतोषप्रद उपचार मिलता है। प्रसूति वार्ड से जरूर शिकायतें आती हैं, लेकिन यह भी डॉक्टरों की कमी के कारण है। सौ बिस्तरों वाला नया प्रसूति वार्ड बनाया है। पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती भी होनी है।
इंदौर की तुलना में देवास हमेशा पिछड़ा हुआ माना जाता है। ऐसा क्यों कि इंदौर में तेजी से विकास होता है और देवास में नहीं ?
शुक्ला- कुछ समय पहले यह धारणा थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ताजा उदाहरण यह है कि पिछले साल रजिस्ट्री से 114 करोड़ रुपये की आय हुई थी जो इस साल बढ़कर 208 करोड़ रुपये हो गई है। एक साल में सौ करोड़ की बढ़ोतरी यह संकेत दे रही है कि इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। सुपर कॉरिडोर स्कीम में खरीदी-बिक्री बढ़ी है। एक से दो साल में यहां बड़े प्रोजेक्ट आएंगे। संस्थागत विकास हो रहा है। रीडेंसीफिकेशन स्कीम के तहत नया कलेक्टोरेट भवन बन रहा है। तहसील परिसर बन रहा है। नए सरकारी क्वार्टर्स बन रहे हैं। नया बस स्टैंड बन रहा है। ओवरब्रिज बन रहे हैं। स्पोर्ट्स पार्क विकसित हुआ है। जो जगह वीरान थी वहां अब सुविधायुक्त स्पोर्ट्स पार्क है जहां लोग सुबह शाम स्पोर्ट्स एक्टिविटी करते हैं। आने वाले सालों में देवास बड़ा इन्वेस्टमेंट जोन बनेगा। अगले कुछ सालों में शहर की सूरत बदल जाएगी।
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जिला अस्पताल का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर
- फोटो : सोशल मीडिया
इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने की कवायद चल रही है। इससे जिले को कितना फायदा होगा ?
शुक्ला- हां, पहले इंदौर-भोपाल के बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने की बात कही गई थी, लेकिन अब जिले के चापड़ा क्षेत्र में इसके बनने की बात सामने आई है। चूंकि यह संबंधित विभाग का मामला है इसलिए इस बारे में कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह जरूर है कि अगर देवास जिले में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनता है तो यह बड़ी सौगात होगी। यह मध्यभारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। जिस जगह एयरपोर्ट बनता है उसके आसपास तेजी से विकास होता है। अगर चापड़ा की जगह फाइनल होती है तो वहां एनएच-59 से जुड़ा है। इंदौर-बुधनी रेल मार्ग से कनेक्टिविटी है। मतलब सड़क और रेल मार्ग दोनों की सुलभता है इसलिए विकास तेजी से होगा।
कृषि के क्षेत्र में जिले में क्या नवाचार हुए। सिंचाई परियोजना अब तक अटकी हुई है। किसान परेशान होते हैं। क्या शासन स्तर से कुछ नहीं हो रहा ?
शुक्ला- कृषि के क्षेत्र में देवास जिले में बेहतर काम हुआ है। बांस की खेती में देवास जिला पूरे प्रदेश में मॉडल बना है। यहां का बांस यूरोप, दुबई तक जाता है। उस पर मेड इन देवास लिखा रहता है। खास बात यह है कि महिलाएं खुद बांस की खेती कर रही हैं और आय के नए स्रोत खुले हैं। सिंचाई परियोजना की बात है तो आने वाले कुछ सालों में देवास जिले के सभी गांव सिंचिंत होंगे। सिंचाई परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। हर गांव को पानी मिलेगा।
पुलिस के साथ समन्वय बनाकर काम करते कलेक्टर
- फोटो : सोशल मीडिया
जिले में बड़ा वन क्षेत्र है। इसे लेकर क्या कोई योजना है। पर्यटन को बढ़ावा मिले ऐसा कोई काम हो रहा है ?
शुक्ला- वन संपदा के लिहाज से देवास जिला समृद्ध है। खिवनी अभयारण्य यहां स्थित है। 54 वर्ग किमी में फैले इस अभयारण्य में सात बाघ हैं जो बहुत बड़ी बात है। अन्य वन्यजीव भी हैं। पर्यटन की दृष्टि से लगातार काम हो रहा है। कई शहरों के लोग यहां आते हैं। कुछ अन्य क्षेत्र भी हैं जिनको लेकर वन विभाग काम कर रहा है।
देवास में काम करने के दौरान क्या चुनौतियां आईं। राजनीतिक हस्तक्षेप भी रहता होगा। कैसे सामंजस्य बैठाते हैं। शुक्ला- देवास एक अच्छा जिला है। यहां बहुत संभावनाएं हैं। राजनीति की बात करें तो यहां की राजनीति अच्छी है। काम में किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। नई योजना के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिलता है। कभी किसी की तरफ से कोई परेशानी नहीं हुई। प्रशासनिक टीम अच्छी है।
खरगोन की घटना को किस रूप में देखते हैं। देवास भी संवेदनशील जिला रहा है। किस तरह से काम करते हैं ?
शुक्ला- खरगोन की घटना के बारे में तो नहीं कह सकता, क्योंकि घटना की जांच हो रही है मगर देवास में स्थिति अच्छी है। यहां रामनवमीं और हनुमान जयंती पर दोनों ही समुदायों का सहयोग मिला। पुलिस के साथ मिलकर कार्ययोजना बनाई। टीम लगातार शहर में घूमी। समुदाय के प्रमुखों के संपर्क में रहे। जनप्रतिनिधियों से बात की। सबके तालमेल से यहां सबकुछ शांति से संपन्न हुआ। आगामी त्योहार भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगे।
आजकल कलेक्टर की नौकरी जोखिमभरी हो गई है। क्या सच में सख्ती बढ़ गई है या कोई और वजह है ?
शुक्ला- नहीं, बात सख्ती या जोखिम की नहीं है। कलेक्टर जिले में सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। बदलते समय के साथ थोड़ा बदलाव जरूर हुआ है। आजकल मॉनिटरिंग बढ़ गई है। डिजिटलाइजेशन के कारण अब वर्चुअली भी मीटिंग होती है। चूंकि जिले का मुखिया कलेक्टर है तो जाहिर है कि जिले की हर छोटी-बड़ी घटना की जिम्मेदारी कलेक्टर की रहती है इस कारण काम बढ़ जाता है। अब पल-पल की मॉनिटरिंग की जाती है। पहले केंद्र सरकार कलेक्टरों से सीधे संपर्क नहीं करती थी, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्र की टीम भी मॉनिटरिंग करती है।
नौकरी के अलावा क्या शौक है। कितना समय दे पाते हैं खुद के लिए ?
शुक्ला- स्पोर्ट्स और साइकलिंग मेरी हॉबी है। साइकलिंग बहुत की है। भोपाल से इंदौर तक साइकिल से गया हूं। इस क्षेत्र में मेरी विशेष पहचान है। इसके अलावा टेनिस खेलना पसंद करता हूं। मेरा यकीन फिटनेस में रहता है। शरीर अच्छा रहेगा तो काम अच्छा होगा। समय की चुनौती रहती है, लेकिन समय प्रबंधन करके खुद को वक्त देता हूं। अपनी टीम से भी फिटनेस की बात कहता रहता हूं।