विवाह कराते हुए लोग
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लोगों की माने तो पहले मेंढक और मेंढकी के विवाह कराए जाते थे, जिससे अच्छी बारिश होने लगती थी, पर इस ट्रैक को चेंज कर दिया है और अन्य शहरों की भांति और दूसरों की देखा-देखी गधा-गधी का विवाह बीच चौराहे पर कराया गया है।
अन्य लोगों की माने तो जैसे अब मजे के लिए कुछ भी करने लगे हैं। नया करने के चक्कर में लोग कुछ भी किए जा रहे हैं। ऐसे तो आने वाले समय में इस तरह से तो परम्पराओं का भी मजाक बनने लगेगा। पहले मेंढक-मेंढकी का विवाह और अब गधा-गधाईया का विवाह महज़ एक उपहास बनकर रह गया है। कई लोगों का कहना है कि इंसान अपने मजे मजाक बनने के लिए इस तरह के काम करता है और टोने-टोटके का सहारा लेता है।