मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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लोकनृत्यों और शिल्प मेले ने बढ़ाया आकर्षण
दिनभर प्रदेश की लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। सीधी के कलाकारों ने अहिराई लाठी नृत्य, टीकमगढ़ के कलाकारों ने मोनिया नृत्य, खंडवा की टीम ने गणगौर नृत्य, उज्जैन की महिलाओं ने मटकी नृत्य, और सागर के दल ने बधाई नृत्य प्रस्तुत किया। सिवनी के कलाकारों ने गोंड जनजातीय गुन्नूरसाई नृत्य से समापन किया।
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विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन
साथ ही, ‘एक जिला-एक उत्पाद’ शिल्प मेला में राज्य के विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन हुआ, जिनमें भोपाल का जूट उत्पाद, बुरहानपुर की जैविक दाल, नर्मदापुरम की अगरबत्ती, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, मंडला की गोंड पेंटिंग और महेश्वरी वस्त्र विशेष आकर्षण का केंद्र बने। अभ्युदय मध्यप्रदेश का दूसरा दिन परंपरा, कला और नवाचार का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि मध्य प्रदेश अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विकास के नए आयाम गढ़ रहा है।