MP Lok Sabha Chunav Result: मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के चारों चरण 13 मई को ही संपन्न हो चुके हैं। इस बार मतदान का प्रतिशत गिरा है। इसे लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने कयास लगा रहे हैं और अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। चार जून को नतीजे सामने आ ही जाएंगे।
मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के चारों चरण 13 मई को ही संपन्न हो चुके हैं। इस बार मतदान का प्रतिशत गिरा है। इसे लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने कयास लगा रहे हैं और अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। चार जून को नतीजे सामने आ ही जाएंगे।
प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी विधानसभा नतीजों से उत्साहित है, साथ ही लोकसभा चुनाव में भी जनता से वैसे ही अपेक्षा कर रही है। मतदान कम होने के पीछे गर्मी, शादी-ब्याह को बताया जा रहा है। पिछले बार लोकसभा की 29 सीटों में से 28 पर भाजपा का कब्जा था और इस बार भाजपा सभी 29 सीटें जीतने का दावा कर रही है। वहीं कांग्रेस भी लोकसभा चुनाव को लेकर उम्मीद से है। कांग्रेस की ओर से 10 से 11 सीटों पर जीत का दावा किया जा रहा है। कम मतदान को कांग्रेस भाजपा के खिलाफ गुस्सा बता रहे हैं। पिछली बार सिर्फ छिंदवाड़ा सीट पर ही कांग्रेस जीती थी। चार जून नतीजे का दिन है, इस दिन का सभी को बेसब्री से इंतजार है। आइए जानते हैं प्रदेश की सभी 29 सीटों का समीकरण।
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गुना में सिंधिया पहली बार भाजपा से मैदान में हैं।
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1. गुना लोकसभा सीट
गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2019 में मिली हार के दाग को मिटाने की चुनौती है। उनके सामने कांग्रेस ने यादवेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। 2019 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े सिंधिया को भाजपा के केपी यादव ने हराया था। इस बार भाजपा ने यादव के स्थान पर सिंधिया को मौका दिया है, जो 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे और इस समय मध्य प्रदेश से राज्यसभा में सांसद हैं। बसपा ने धनीराम चौधरी को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश जरूर की है लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस में ही है। कुल 15 उम्मीदवार यहां से भाग्य आजमा रहे हैं। भाजपा इस सीट को बड़े अंतर से जीतने का दावा कर रही है। 2024 में यहां 72.43 प्रतिशत वोटिंग हुई है।
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विदिशा सीट है खास
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2. विदिशा लोकसभा सीट
लोकसभा चुनाव में विदिशा-रायसेन सीट से भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस से पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा के बीच मुकाबला है। इस मुकाबले में कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए विदिशा से प्रतापभानु शर्मा को मैदान में उतारा है तो भाजपा ने विधानसभा चुनाव के बाद दरकिनार किए शिवराज पर दांव खेला है। यहां से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सुषमा स्वराज सहित गोयनका जैसे दिग्गज नेता विदिशा लोकसभा से उम्मीदवार रह चुके हैं। विदिशा लोकसभा क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां से कांग्रेस इतिहास में केवल दो बार जीत पाई है। भाजपा को शिवराज की लोकप्रियता का भरोसा है और उनकी सक्रियता से बड़ी जीत का दावा किया जा रहा है। इस बार 74.48 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले हैं।
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छिंदवाड़ा लोकसभा सीट
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3. छिंदवाड़ा लोकसभा सीट
छिंदवाड़ा यूं तो कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। कमलनाथ की ये सीट लंबे समय से कांग्रेस के पास है। बीते दो लोकसभा चुनाव में मोदी लहर भी यहां कुछ नहीं कर सकी। कांग्रेस के गढ़ को जीतने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। यहां लोग कमलनाथ के काम को अभी भी याद करते हैं। पूर्व सीएम कमलनाथ ने ही चुनाव का मोर्चा संभाल रखा। वे जनता से अपने 44 साल के रिश्तों को बता और भावनात्मक अपील कर वोट मांगते नजर आ चुके हैं। दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी बंटी साहू के लिए पूरी भाजपा ही चुनाव मैदान में है। भाजपा मोदी को आगे रखकर चुनाव लड़ी। कांग्रेस अपनी इस सीट के जीत को लेकर आश्वस्त है। इस बार यहां 79.83 प्रतिशत वोटिंग हुई है।
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राजगढ़ में दिग्विजय सिंह और नागर में रहा मुकाबला
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4. राजगढ़ लोकसभा सीट
राजगढ़ लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को उतारकर चर्चित बना दिया। देश के बड़े नेताओं में शुमार दिग्विजय सिंह के परिणाम पर सबकी नजर है। कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त दिख रही है। उसका कहना है कि क्षेत्र के लोग भाजपा प्रत्याशी से खुश नहीं हैं। वहीं दिग्विजय ने अपना अंतिम चुनाव बताकर इमोशनल कार्ड भी खेला है। भाजपा की ओर से सांसद रोडमल नागर को उतारा गया है। वे मोदी के चेहरे के भरोसे चुनाव लड़े हैं। तीसरे चरण में राजगढ़ लोकसभा का मतदान संपन्न हुआ और मतदान प्रतिशत भी बढ़ा है। इसे दोनों पार्टी अपने पक्ष में मान रही हैं। इस सीट पर इस बार 76.04 प्रतिशत वोटिंग हुई है।
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इंदौर लोकसभा चुनाव
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5. इंदौर लोकसभा सीट
इस बार इंदौर लोकसभा अलग ही कारण से चर्चा में रही। भाजपा का गढ़ और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को नौ बार सांसद बनाने वाली इंदौर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का कोई प्रत्याशी इस बार मैदान में नहीं था। कांग्रेस ने अक्षय बम को प्रत्याशी बनाया था पर नामवापसी के आखिरी दिन उन्होंने नाम वापस ले लिया और भाजपा में चले गए। हालांकि इस प्रकरण से भाजपा के लोग भी नाराज नजर आए थे। इसका नतीजा ये रहा कि इंदौर काफी कम मतदान हुआ है। यहां से भाजपा ने अपने सांसद शंकर लालवानी को मैदान में उतारा है। भाजपा इस सीट पर बड़ी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। इस बार यहां 60.53% वोटिंग हुई है।
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भोपाल लोकसभा सीट पर इनके बीच था मुकाबला
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6. भोपाल लोकसभा सीट
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की संसदीय सीट पर भाजपा का 35 साल से कब्जा है। 1989 के बाद से भाजपा को यहां शिकस्त नहीं मिली है। पूर्व महापौर आलोक शर्मा के सामने कांग्रेस ने एडवोकेट अरुण श्रीवास्तव को उतारा है। 1989 के बाद से इस संसदीय सीट पर भाजपा ने कभी हार का सामना नहीं किया। भाजपा इस सीट पर जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रही है। भाजपा भी मुकाबला कड़ा होने की बात कह रही है। चार जून को नतीजे साफ हो जाएंगे। इस बार इस सीट पर 64.06 प्रतिशत मतदान हुआ है।
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बैतूल लोकसभा क्षेत्र में दोनों दलों में ही मुकाबला होता रहा है।
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7. बैतूल लोकसभा सीट
बैतूल लोकसभा सीट पर हमेशा से ही मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच रहा। 1952 में बैतूल संसदीय सीट का गठन हुआ तभी से यहां भाजपा का राज रहा है। गठन होने के पांच चुनावों में कांग्रेस की जीत हुई मगर फिर भाजपा सत्ता में आई और कांग्रेस को जीत हासिल नहीं हुई। इससे ये साफ है कि बैतूल लोकसभा में ये दोनों ही पार्टी मुख्य मुकाबले में रहती है । इस बार भी भाजपा से दुर्गादास उईके और कांग्रेस के रामू टेकाम मैदान में थे। अब देखना ये होगा कि 4 जून को किसकी पताका लहराती है। इस बार इस सीट पर 73.48 फीसद वोटिंग हुई है।
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मंदसौर में भाजपा से सुधीर गुप्ता और कांग्रेस दिलीप गुर्जर में मुकाबला रहा।
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8. मंदसौर लोकसभा सीट
ध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट भाजपा का परंपरागत गढ़ रही है। अब तक सिर्फ चार बार कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली है। जबकि सीट पर एक बार भारतीय जनसंघ एक बार जनता पार्टी और आठ बार भाजपा के खाते में गई है। मंदसौर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे आठ बार सांसद रहे हैं। 2009 में जब कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उतारा, तब पांडे का विजयी रथ थमा था। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर का जादू चला और भाजपा के सुधीर गुप्ता इस सीट को दोबारा कांग्रेस से छीनने में कामयाब रहे थे। दोनों बार उनकी जीत का अंतर तीन लाख वोट से अधिक का रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव में मंदसौर लोकसभा सीट से भाजपा ने तीसरी बार सुधीर गुप्ता को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने ओबीसी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से कांग्रेस नेता व नागदा के पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर को चुनाव मैदान में उतारकर ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश की है। इस बार 73.03 प्रतिशत वोटिंग हुई है।
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सागर में मतदान का प्रतिशत 65.75% रहा है।
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9. सागर लोकसभा सीट
सागर संसदीय सीट पर मुख्य मुकाबला हमेशा की तरह इस बार भाजपा तथा कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। कहने को तो यहां बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना प्रत्याशी उतारा है। सागर लोकसभा सीट से भाजपा ने अपना प्रत्याशी मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष लता वानखेडे़ को बनाया है। कांग्रेस ने यहां से चंद्रभूषण बुंदेला को मैदान में उतारा है। चंद्रभूषण सिंह बुंदेला 6 माह पहले विधानसभा चुनाव के समय बहुजन समाज पार्टी का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। सागर लोकसभा सीट की जनसंख्या 23 लाख 13 हजार 901 है, जिसमें से 72 प्रतिशत लोग गांवों में और 27 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। इस बार मतदान का प्रतिशत 65.75% रहा है। इसमें पुरुष मतदान 70% जबकि महिला मतदान 61% रहा है।
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देवास लोकसभा सीट का गणित
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10. देवास लोकसभा सीट
देवास संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र सम्मिलित हैं। सीहोर जिले से एक, शाजापुर से तीन, देवास से तीन और आगर-मालवा जिले से एक सीट इसमें शामिल है। 2023 के विधानसभा चुनाव में देवास लोकसभा क्षेत्र की देवास सीट को छोड़ बाकी सातों सीटों पर 75 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। आठों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए देवास संसदीय क्षेत्र से आठ प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा से महेंद्र सिंह सोलंकी, कांग्रेस से राजेंद्र राधाकिशन मालवीय और छह अन्य उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इस बार यहां 74.86 प्रतिशत मतदान रहा।
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भिंड में भी त्रिकोणीय मुकाबला है।
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11. भिंड लोकसभा सीट
मुख्य मुकाबला भाजपा की मौजूदा सांसद संध्या राय और कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के बीच है। देवाशीष जरारिया के बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर कुल सात उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं। भिंड लोकसभा सीट पर तीसरे चरण में मतदान हुआ। 54.93 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। भिंड लोकसभा सीट में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें अटेर, भिंड, लाहर, मेहगांव, गोहाद, सेवदा, भांडेर और दतिया शामिल है। खास बात यह है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में चार-चार सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को जीत मिली थी।
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मुरैना में मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है।
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12. मुरैना लोकसभा सीट
भाजपा ने नरेंद्र सिंह तोमर की समर्थक पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह तोमर को उतारा है। कांग्रेस ने सुमावली से भाजपा के पूर्व विधायक रहे सत्यपाल सिंह सिकरवार को टिकट दिया है। दोनों प्रत्याशी क्षत्रिय समाज से आते हैं। कांग्रेस की टिकट की दौड़ में शामिल रहे रमेश गर्ग ने बगावती रुख अपनाते हुए बसपा की टिकट पर ताल ठोकी है। इस बार यहां 58.97 प्रतिशत मतदान हुआ है। 61.68 प्रतिशत पुरुषों ने और 55.86 प्रतिशत महिलाओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने 2019 में मुरैना संसदीय सीट से चुनाव जीता था। मुरैना सीट की बात करें तो यहां ब्राह्मणों और राजपूतों का दबदबा माना जाता है। इस क्षेत्र के वोटर यहां निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। दोनों ही जातियों के दो-दो लाख वोटर हैं। दलित मतदाता भी इस सीट पर करीब पौने तीन लाख है।
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ग्वालियर लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला इनके बीच रहा
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13. ग्वालियर लोकसभा सीट
कांग्रेस का टिकट मांग रहे कल्याण सिंह कंसाना बहुजन समाज पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। इस बार भाजपा ने सांसद विवेक नारायण शेजवलकर का टिकट काटकर भारत सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक को उम्मीदवार बनाया है। ग्वालियर मध्य प्रदेश की उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां 2019 के मुकाबले ज्यादा वोटिंग हुई है। इस बार 62.13 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो 2019 के 59.78 प्रतिशत के मुकाबले करीब ढाई प्रतिशत अधिक है। 2023 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा सीट की आठ में से चार-चार सीटें भाजपा और कांग्रेस की झोली में गिरी थी।
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दमोह में दो दोस्तों के बीच मुकाबला रहा
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14. दमोह लोकसभा सीट
भाजपा के राहुल सिंह और कांग्रेस के तरवर सिंह में मुख्य मुकाबला है। दमोह लोकसभा में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें दमोह, पथरिया, हटा और जबेरा वहीं सागर जिले की रहली, देवरी और बंडा विधानसभा आती हैं। इसके अलावा छतरपुर जिले की बड़ा मलहरा विधानसभा भी दमोह लोकसभा में आती है और केवल इसी सीट पर कांग्रेस विधायक रामसिया भारती हैं, बाकी सात विधानसभा में भाजपा के विधायक हैं और जिसमें पथरिया और जबेरा से मंत्री भी हैं। इसके बाद भी दमोह लोकसभा में 2024 के चुनाव में 56.48 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2019 लोकसभा चुनाव से 9.34 प्रतिशत कम है। दमोह लोकसभा भाजपा का गढ़ बन चुकी है। 1989 से यह क्रम शुरू हुआ और 35 साल से भाजपा प्रत्याशी ही जीतते आ रहे हैं।
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शहडोल लोकसभा चुनाव में दोनों दलों का ही प्रभाव है।
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15. शहडोल लोकसभा सीट
शहडोल सीट में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है। दोनों पार्टियों के अलावा दूसरी किसी अन्य पार्टियों का शहडोल लोकसभा सीट में कोई ज्यादा प्रभाव नहीं है। भाजपा ने मौजूदा सांसद हिमाद्री सिंह को तो कांग्रेस ने पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को को चुनावी मैदान में उतारा था। शहडोल लोकसभा सीट में पिछले दो दशक से भाजपा का दबदबा रहा है। 2009 के चुनाव में कांग्रेस की जीत मिली थी, लेकिन उसके पहले और वर्तमान समय तक शहडोल सीट में भाजपा का दबदबा है। इस बार यहां 64.68 फीसद वोटिंग हुई है।
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खंडवा लोकसभा चुनाव में दोनोें दलों को अपनी जीत की उम्मीद है।
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16. खंडवा लोकसभा सीट
खंडवा लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा। यहां भारतीय जनता पार्टी की ओर से वर्तमान सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल को ही टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारा गया है, तो वहीं कांग्रेस की ओर से एक नया नाम सामने आया था। कांग्रेस ने बड़वाह विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बावजूद एक बार फिर से नरेंद्र पटेल को ही लोकसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है। 2024 में लोकसभा इलेक्शन में मतदान का प्रतिशत 70.72% रहा है।
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खरगोन लोकसभा सीट
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17. खरगोन लोकसभा सीट
खरगोन लोकसभा में कांग्रेस प्रत्याशी पोरलाल खरते और भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी गजेंद्र सिंह पटेल चुनाव मैदान में हैं। खरगोन लोकसभा में दोनों ही पार्टियों ने एड़ी चोटी का जोर लगाया है। इस बार चौथे चरण में शामिल खरगोन सीट पर 75.79 प्रतिशत हुआ है। खरगोन में पिछली बार भाजपा ने बाजी मारी थी। इस बार कांग्रेस ने जोर लगाया है।
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टीकमगढ़ लोकसभा सीट
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18. टीकमगढ़ लोकसभा सीट
टीकमगढ़ लोकसभा सीट को भी भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस के बेहद युवा उम्मीदवार पंकज अहिरवार से उनका मुकाबला रहा। बसपा ने टीकमगढ़ से दल्लूराम अहिरवार को प्रत्याशी बनाया था। 26 अप्रैल को 60 फीसदी वोट डाले गए। इस लोकसभा सीट में 8 विधानसभाएं हैं जिनमें टीकमगढ़ जिले की टीकमगढ़, जतारा, खरगपुर, निवारी जिले की पृथ्वीपुर और निवारी, छतरपुर जिले की महाराजपुर, छतरपुर, बिजावर सीटें शामिल हैं। इनमें तीन पर कांग्रेस का कब्जा है, वहीं पांच पर भाजपा काबिज है।
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मंडला लोकसभा सीट
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19. मंडला लोकसभा सीट
मंडला लोकसभा सीट पर कांटे की टक्कर मानी जा रही है। भाजपा उम्मीदवार तथा केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते तथा कांग्रेस से चार बार के विधायक तथा राहुल गांधी की गुड लिस्ट में शामिल ओमकार सिंह मरकाम के बीच सीधी टक्कर है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी वोट कटवा के भूमिका निभाते हुए हार-जीत में अहम भूमिका अदा कर सकते है। भाजपा प्रत्याशी इस सीट से आठवीं बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। मंडला विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाली आठ विधानसभा सीट में सात सीट आदिवासी तथा एक सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। जिसमें से पांच पर कांग्रेस तथा तीन पर भाजपा का कब्जा है। इस बार मंडला लोकसभा सीट पर 72.84 प्रतिशत मतदान हुआ है।
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खजुराहो लोकसभा सीट
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20. खजुराहो लोकसभा सीट
खजुराहो लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा उम्मीदवार हैं। यहां सपा उम्मीदवार मीरा यादव का नामांकन रद्द हो गया था. जिसके बाद यहां से सपा-कांग्रेस का कोई प्रत्याशी ही नहीं है। हालांकि, इंडी गठबंधन ने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रत्याशी आरबी प्रजापति को समर्थन दिया है। फिर भी चुनाव एकतरफा माना जा रहा है। इस सीट पर 1989 से भाजपा का दबदबा रहा है। इस लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 56.97% मतदान हुआ है।
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सतना लोकसभा सीट
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21. सतना लोकसभा सीट
यहां पर बीजेपी ने पुराने प्रत्याशी पर एक बार फिर से भरोसा जताया है। भाजपा ने वर्तमान सांसद गणेश सिंह को उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाह को टक्कर देने उतारा है। विधानसभा चुनाव में कुशवाह ने गणेश सिंह को हराया था। अब फिर दोनों आमने-सामने है। यहां गणेश सिंह की मुसीबत उनकी पार्टी के दल बदलू नारायण त्रिपाठी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने चुनाव के ऐन पहले बसपा का दामन थाम लिया था। कुर्मी वोट गणेश सिंह और कुशवाह वोट सिद्धार्थ को मिलेंगे, जिनकी हिस्सेदारी लगभग बराबर है। अब 22 प्रतिशत ब्राह्मण वोटर जीत हार तय करेंगे। यहां 61.94 प्रतिशत मतदान हुआ है।
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रतलाम झाबुआ लोकसभा
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22. रतलाम लोकसभा सीट
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट भी एमपी की चर्चित सीट से में एक है। आदिवासी बहुल इस सीट से कांग्रेस ने दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री कांतिलाल भूरिया को मैदान में उतारा है। तो भाजपा ने प्रदेश सरकार में वनमंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनीता चौहान पर भरोसा जताया है। भूरिया यहां से पांच बार जीत हासिल कर चुके हैं। झाबुआ सीट पर भी इस बार 72.86 प्रतिशत मतदान हुआ है। जो पिछले चुनाव से तीन प्रतिशत कम है।
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रीवा लोकसभा सीट
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23. रीवा लोकसभा सीट
रीवा में जनार्दन मिश्रा को फिर भाजपा ने टिकट दिया है। कांग्रेस ने पार्टी के विधायक अभय मिश्रा की पत्नी नीलम मिश्रा मैदान में है। ये दोनों किसी समय भाजपा के सदस्य थे। इस बार इस सीट पर 67.21 परसेंट वोटिंग हुई है।
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धार लोकसभा सीट
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24. धार लोकसभा सीट
धार लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की सावित्री ठाकुर और कांग्रेस से राधेश्याम मुवेल चुनाव मैदान में हैं। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यहां अच्छा प्रदर्शन किया था। धार लोकसभा सीट में सरदारपुर, गंधवानी,कुक्षी,मनावर, धरमपुरी, धार,बदनावर और महू विधानसभा सीट शामिल है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आठ सीटों में से पांच सीटें जीती थी, जबकि भाजपा को तीन सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस बार 71.50 प्रतिशत वोटिंग इस लोकसभा सीट पर हुई है। इस लोकसभा सीट की आठ में से छह विधानसभा सीटों पर आदिवासी वोटबैंक निर्णायक स्थिति में रहता है।
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सीधी लोकसभा सीट
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25. सीधी लोकसभा सीट
सीधी लोकसभा सीट पर भाजपा ने राजेश मिश्रा और कांग्रेस ने कमलेश्वर पटेल को चुनाव मैदान में उतारा है। सीधी लोकसभा सीट पर 1962 से अब तक 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें 7-7 बार भाजपा और कांग्रेस में बराबरी का मुकाबला रहा। एमपी में हुए पेशाब कांड के बाद यह सीट चर्चित सीट बन गई है। सीधी लोकसभा क्षेत्र में तीन जिलों के आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसमें सीधी जिले की चार—सीधी, चुरहट, सिंहावल और धौहनी हैं। इसमें से चुरहट सीट कांग्रेस के कब्जे में है। सिंगरौली जिले की तीन विधानसभा सीटें— सिंगरौली, चितरंगी, देवसर तीनों पर भाजपा का कब्जा है। वहीं, शहडोल जिले की एक सीट ब्यौहारी भी सीधी संसदीय क्षेत्र में आती है। यह सीट भी भाजपा के कब्जे में है। इस बार यहां 56.50 फीसदी वोटिंग हुई है।
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होशंगाबाद लोकसभा सीट
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26. होशंगाबाद लोकसभा सीट
होशंगाबाद सीट पर भाजपा ने दर्शन सिंह को प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के संजय शर्मा से हुआ। शर्मा दो बार के विधायक हैं। वे भाजपा में रहे हैं। वे प्रभावशाली व्यक्ति हैं, लेकिन क्षेत्र भाजपा का गढ़ है। मोदी के चेहरे का लाभ दर्शन सिंह को मिल रहा है। इस क्षेत्र की सभी आठ सीटें भाजपा के पास हैं। इस क्षेत्र से प्रहलाद पटेल, राव उदय प्रताप सिंह और नरेंद्र शिवाजी पटेल तीन मंत्री आते हैं। इस सीट पर 67.21% मतदान हुआ है। 2019 में 74.17% मतदान हुआ था।
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जबलपुर लोकसभा सीट
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27. जबलपुर लोकसभा सीट
जबलपुर भाजपा का मजबूत गढ़ है। इस सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा प्रत्याशी आशीष दुबे के समर्थन में रोड शो कर अपने प्रचार की शुरुआत की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, सीएम डॉ. मोहन यादव समर्थन में प्रचार कर चुके हैं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश यादव के अपने दावे हैं। भाजपा प्रचार में जोर दे रही है। कांग्रेस महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी ओर एकता ठाकुर के भाजपा में शामिल होने से कांग्रेस कमजोर भी हुई थी। आठ विधानसभा में से सात पर भाजपा का कब्जा है। इस बार इस सीट पर 61 प्रतिशत मतदान हुआ है।
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बालाघाट लोकसभा सीट
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28. बालाघाट लोकसभा सीट
बालाघाट संसदीय सीट पर भाजपा ने सांसद ढाल सिंह बिसेन का टिकट काट कर भारती पारधी को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस के सम्राट सरस्वार सामान्य वर्ग से आते हैं। वह क्षेत्र के आदिवासी वोटों को साधने में लगे रहे। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे बसपा की सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों की ही चिंता बढ़ा दी है। कंकर की पत्नी अनुभा मुंजारे कांग्रेस से विधायक हैं। ऐसे में इससे कांग्रेस को नुकसान ज्यादा होता दिख रहा है। इस सीट पर पुरुष मतदाताओं से ज्यादा महिला मतदाताओं की संख्या है। इस सीट पर आठ विधानसभाएं हैं, इनमें से 4 कांग्रेस और 4 पर भाजपा का कब्जा है। इस बार बालाघाट लोकसभा सीट पर 73.45 प्रतिशत मतदान हुआ है।
29. उज्जैन लोकसभा सीट
उज्जैन संसदीय सीट पर भाजपा ने सांसद अनिल फिरोजिया को फिर प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने महेश परमार को प्रत्याशी बनाया है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का क्षेत्र है। तराना से विधायक और कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार क्षेत्र में भाजपा को टक्कर देते आए हैं। यहां पर सात में से 6 सीट पर भाजपा विधायक जीते हैं। 2019 के चुनाव फिरोजिया ने 3.65 लाख वोटों से जीता था। इस बार 73.03 प्रतिशत मतदान हुआ है।