महिलाओं के विकास और उनकी सियासत में हिस्सेदारी का लंबा इतिहास रहा है। महिला मतदाताओं के वोट पाने को हर राजनीतिक दल आतुर रहता है, लेकिन महिलाओं को टिकट देने से परहेज करता है।
मध्य प्रदेश 1956 में नया राज्य बना और 1957 में यहां पहले विधानसभा चुनाव हुए। 1957 के चुनाव में सभी राजनैतिक दलों ने 36 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिए थे। इनमें से 15 प्रत्याशी विजयी रही थीं। तब महिला उम्मीदवारों में सर्वाधिक मतों से भोपाल की लीना राय 15 हजार 609 मतों से विजयी रही थी।
जद्दोजहद और बार-बार संसद में पेश करने और सहमति नहीं बन पाने के कारण महिला आरक्षण बिल को काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। आखिर लोकसभा और राज्य विधानसभाओ में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का विधेयक मोदी सरकार ने हालिया विशेष संसद सत्र में पारित करा लिया। जाहिर है कि 2026 के बाद परिसीमन होगा और उसके बाद यह लागू होगा। तब देश की संसद व विधानसभाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।