हेमवती नंदन बहुगुणा ने इंदिरा गांधी से अनबन होने पर मुख्यमंत्री का पद बहुत पहले ही छोड़ दिया था। आपातकाल लगाने पर भी उनके और इंदिरा के बीच गहरे मतभेद थे। उस दिन मौनी अमावस्या थी। बहुगुणा हमेशा मौनी अमावस्या के दिन संगम पर जाकर सपरिवार स्नान करते थे। उस दिन भी वे सपरिवार संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी बीच उन्हें पता चला कि इंदिरा ने चुनाव का ऐलान कर दिया है।
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हेमवती नंदन बहुगुणा
यह जानकारी मिलते ही उन्होंने नई पार्टी का खाका खींचना शुरू कर दिया। बाद में पता चला कि वह उस दौरान कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी (सीएफडी) की परिकल्पना को कागज पर उतार रहे थे। कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी क्यों’ में उन्हें करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार रामनरेश त्रिपाठी ने लिखा है, ‘बहुगुणा दिल्ली पहुंचे और नई पार्टी के राजनीतिक समीकरण तैयार करने लगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को तोड़कर अपने साथ लाने की योजना बनाई। बाबू जगजीवन राम की गिनती उस समय कांग्रेस के सशक्त और प्रभावशाली नेताओं में होती थी। वे कांग्रेस के स्तंभ माने जाते थे और बहुगुणा को काफी मानते थे।
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हेमवती नंदन बहुगुणा
- फोटो : अमर उजाला
बहुगुणा चाहते थे कि जगजीवन राम को पार्टी में शामिल करके कांग्रेस को बड़ा झटका दिया जाए। इस प्रयास में जगजीवन राम के पुत्र सुरेश कुमार ने बहुगुणा का साथ दिया। उन्होंने काफी गोपनीय तरीके से जगजीवन राम को बहुगुणा के साथ कांग्रेस छोड़ने के लिए राजी कर लिया।
यह सब इतना गोपनीय रहा कि इंदिरा को भनक नहीं लगी। उन्हें तब मालूम हुआ जब बाबू जगजीवन राम, बहुगुणा के साथ प्रभावशाली कांग्रेस नेता नंदिनी सत्पथी और राजमंगल जैसे कद्दावर नेताओं ने एक साथ कांग्रेस छोड़ने की घोषणा कर दी।