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मुश्किल: पटरी पर लौट रही महंगी तेजस में यात्री जुटाना होगा चुनौती, कम किराए वाली ट्रेनों में ही सीटें खाली

Sat, 31 Jul 2021 04:58 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : अमर उजाला
सात अगस्त से तेजस एक्सप्रेस पटरी पर लौट रही है। हालांकि, आईआरसीटीसी को इसके लिए यात्रियों को आकर्षित करने की चुनौती से जूझना होगा। वह भी ऐसे वक्त पर जब दिल्ली की वीआईपी ट्रेनें लखनऊ मेल, शताब्दी व एसी एक्सप्रेस में सीटें खाली पड़ी हैं।

देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस यात्री न मिलने से पहले भी तीन बाद बंद हो चुकी है। चार अगस्त, 2019 को यह ट्रेन शुरू हुई थी। इसके बाद कोरोना की वजह से 19 मार्च, 20 को पहली बार ट्रेन बंद हुई। ट्रेन पांच महीने बाद चली, पर 23 नवंबर 20 को यात्री न मिलने से बंद हो गई। इसके बाद चार अप्रैल 21 को तीसरी बार ट्रेन बंद हुई थी।

यह है सीटों की स्थिति
तेजस की चेयरकार में सात, आठ व नौ अगस्त को क्रमश: 641, 628, 663 तथा एग्जीक्यूटिव क्लास में 47, 51, 52 सीटें खाली हैं। चेयरकार का किराया 1134 व एग्जीक्यूटिव का 2321 रुपये है। वहीं, शताब्दी एक्सप्रेस की चेयरकार में इन तारीखों पर 819, 826, 878 तथा एग्जीक्यूटिव में 13, 7 व 16 सीटें खाली हैं। दोनों श्रेणियों में किराया तेजस से कम क्रमश: 820 व 1770 रुपये है।

एसी एक्सप्रेस की थर्ड एसी में 334, 352, 363, सेकेंड में 118, 114 व 123 सीटें खाली हैं। लखनऊ मेल की स्लीपर में सात को आरएसी चल रही है। आठ व नौ को 115, 92 सीटें खाली हैं। थर्ड एसी, सेकेंड एसी में 69, 33 व 107, 42 और 130, 70 सीटें खाली हैं।
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यह है तेजस का शेड्यूल
सात अगस्त से तेजस एक्सप्रेस (82501/02) लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच फिर से दौड़नी शुरू होगी। यह हफ्ते में चार दिन शुक्रवार, शनिवार, रविवार व सोमवार को चलेगी।
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ट्रेन लखनऊ जंक्शन से सुबह 6.10 बजे रवाना होकर नई दिल्ली दोपहर 12.25 बजे पहुंचती है। वापसी में नई दिल्ली से तेजस एक्सप्रेस दोपहर 3.40 बजे चलकर रात 10.05 बजे लखनऊ पहुंचती है। मुंबई-अहमदाबाद तेजस भी सात से शुरू होगी।

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हॉलेज, मेंटीनेंस चार्ज भी है मुश्किल
यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि तेजस एक्सप्रेस के संचालन के आड़े सिर्फ यात्रियों की कम संख्या ही नहीं आती।
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- फोटो : amar ujala
रेलवे बोर्ड की ओर से तेजस के एवज में जो हॉलेज व मेंटेनेंस चार्ज लिया जाता है, उसे माफ किए बिना ट्रेन को लंबे समय तक पटरी पर रखना आसान नहीं होगा। करीब 18 करोड़ रुपये आईआरसीटीसी पर बकाया है। यह कम हो जाए तो टिकट दरें भी घटाई जा सकती हैं।
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