राजा व उनके सैनिकों ने देखा कि घुघुति पेड़ के नीचे सुरक्षित सोया हुआ है। उसके आसपास कौवे उड़ रहे हैं। राजा ने घुघुति को उठाया और गले से लगा लिया। घर लौटने पर घुघुति की मां ने कहा कि अगर यह माला न होती तो आज घुघुति जिंदा न होता। खुश होकर मां ने कौवों के लिए पकवान बनाए और घुघुति से कहा कि वह उन्हें बुलाकर खिला दे। बात धीरे-धीरे कुमाऊं में फैल गई। इस तरह घुघुति एक त्योहार के रूप में पूरे कुमाऊं में फैल गया। कुमाऊं में एक कहावत भी मशहूर है कि श्राद्धों में ब्राह्मण और उत्तरायनी को कौए मुश्किल से मिलते हैं।