फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पितृपक्ष 14 से, पूरे मन से करें पितरों के कार्य, नहीं तो भोगने पड़ेंगे ये कष्ट

Fri, 13 Sep 2019 04:54 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 7
प्रतीकात्मक समारोह
पितरों को पूजने का पर्व पितृपक्ष 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, शुक्रवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा का मान मिलने से पूर्णिमा को मृत्यु पाए पितरों का तर्पण-श्राद्ध कर्म करना इसी दिन श्रेयस्कर रहेगा। 14 सितंबर से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा लगने से पितृपक्ष में पितरों का पूजन-तर्पण शुरू होगा। जिन तिथियों में पितरों-पूर्वजों की मृत्यु हुई हो, जजमानों को उन्हीं तिथियों में अपने पितर का तर्पण करना चाहिए।
विज्ञापन

2 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ के गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप ने बताया कि पितरों का श्राद्ध तर्पण मध्यान्ह में किया जाना ठीक रहता है। शुक्रवार को मध्यान्ह में पूर्णिमा मिलने केचलते षोडशी श्राद्ध करने वालों को शुक्रवार की दोपहर ही पूर्णिमा को मृत्यु पाए पितरों का श्राद्ध करना उत्तम रहेगा। शनिवार को प्रतिपदा से पितृपक्ष की तिथिवार तर्पण होगा। पितृपक्ष की जिन तिथियों में पितरों-पूर्वजों की मृत्यु होती है, जजमानों को उन्हीं तिथियों में अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए।
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
सुहागिनों का तर्पण 23 को
23 सितंबर को मातृनवमी का सुहागिन औरतों का तर्पण करना उत्तम रहेगा। सन्यासी, गृहस्थों का श्राद्ध द्वादशी के दिन करना चाहिए। अकाल मृत्यु पाए, शस्त्रों से मृत्यु पाए या जिनका मृत्यु काल स्पष्ट न हो उन्हें चतुर्दशी के दिन श्राद्ध करना चाहिए। अमावस्या का श्राद्ध 28 सितंबर को होगा। इस दौरान मंगल कार्यो से बचना चाहिए।

4 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
सामूहिक पिंड तर्पण आज से
उधर, इंदिरा नगर सेक्टर-9 के 9/191 स्थित गायत्री ज्ञान मंदिर में पितृपक्ष के मौकेपर 13 सितंबर से सामूहिक पिंड तर्पण की शुरुआत होगी। मुख्य  संयोजक उमानंद शर्मा ने बताया कि  पूर्णिमा का तर्पण 13 सितंबर को शुरू होगा। उसके बाद 28 सितंबर तक चलने वाला तर्पण सुबह 5:30 बजे से नियमित चलेगा।
विज्ञापन

5 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
श्राद्ध तर्पण-पूजन विधि
सुबह स्नान-पूजन के बाद जजमान को पितरों को तर्पण के साथ पिंडदान करना चाहिए। हथेली भर अनाज का पिंड (जौं के आटे या खीर या गौ दुग्ध के खोये) बनाकर उसे पितरों को अर्पण करना चाहिये। गंगाजल, कुश, काले तिल, फूल-फल और दुग्ध व उनसे बने खाद्यान्न अर्पण करने चाहिये। मध्यान्ह से पूर्व ब्राह्मण को भोज कराने के साथ उन्हें यथायोग्य वस्त्रादि दान देना चाहिये। सुबह 11 बजकर 33 मिनट से 12 बजकर 21 मिनट के मध्य पितृपक्ष के श्राद्ध का बेहतर समय रहता है।
विज्ञापन

6 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
पितृ पक्ष में पूरे मन से करें पितरों के कार्य
ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पांडेय ने बताया कि श्राद्ध कार्य कभी भी मध्याह्न में ही करना चाहिये। बहुत लोग इस बात से भ्रमित रहते है कि मैंने इस वर्ष अपनी कन्या या पुत्र का विवाह आदि मांगलिक कार्य किया है। इस वर्ष पितृ पक्ष का जल दान,अन्न दान, पिंड दान न करें। यह अशुभ है, परन्तु निर्णयसिंधुकार के अनुसार सभी मांगलिक कार्यों में पितृ कार्य उत्तम व आवश्यक माना गया है। कहा गया है कि देवताओं की करी गयी पूजा में कदाचित भूल होने पर देवता क्षमा कर देते हैं। परंतु पितृ कार्य में न्यूनता व आलस्य प्रमाद करने से पितर असंतुष्ट हो जातें है, जिससे हमें रोग, शोक आदि भोगने पड़ते हैं। इसलिये पितरों का काम पूरे मन से करने चाहिये।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा मृत्युलोक में भटकती रहती है। इसलिये पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें