कानूनी मान्यता मिलने के बाद जितनी तेजी से लिव इन का ट्रेंड सामने आया, अब उतनी ही तेजी से इसके चलते रिश्तों में आ रही दरार, टूट रहे परिवार की कहानियां सामने आने लगी हैं। पहले साथ रहने की जिद का नतीजा, अब साथ छोड़ने की जल्दी बन चुका है।
ऐसे रिश्तों को प्रेम व परिवार का नाम देने वाले इससे जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं। यही नहीं, अभी तक पति-पत्नी के बीत तनाव का कारण बनने वाले अवैध संबंधों को बढ़ावा देने के आधार भी लिव इन रिश्ता बन रहा है। 181 वन स्टॉप सेंटर, डीसीपी महिला अपराध व पारिवारिक परामर्श केंद्रों में बढ़ रहे मामले इसका प्रमाण हैं। लिव इन के ज्यादातर मामलों में कॉरपोरेट की नौकरी करने वाले या फिर सरकारी अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
ये कहते हैं आंकड़े
- 40 फीसदी मामले कॉरपोरेट क्षेत्र के लोगों के
- 30 फीसदी मामले सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों से जुड़े
- 30 फीसदी मामले निचले तबके व गैर पढ़े लिखे लोगों से संबंधित
आंकड़ों से समझें समस्या की गंभीरता
- महिला अपराध व सुरक्षा- 02 मामले
- 181 वन स्टॉप सेंटर - 63 मामले
- आली संस्था - 02 मामले
- सुरक्षा पारिवारिक परामर्श केंद्र - 20 मामले (नोट ये सभी मामले जनवरी से जून 2021 तक के हैं)