अवध सम्मान समारोह के दौरान लखनऊ में दिलीप कुमार।
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कवि अस्थाना ने भेंट की थी अनूठी कविता
स्माइल मैन सर्वेश अस्थाना कहते हैं कि अवध सम्मान लेने जब वे आए थे, तब मैंने उनके लिए एक कविता लिखी थी, दिलीप की अभिनय गाथा। इसकी खासियत ये है कि इसमें दिलीप साहब की पहली फिल्म से लेकर सौदागर, किला तक का जिक्र किया गया। यानी उनके फिल्मों के नाम को मिलाकर ही कविता लिखी गई, जिसकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं... ‘सगीना’ में ‘बैराग’ था ‘क्रांति और शक्ति’ बीच, ‘विधाता’ ने ‘आग का दरिया’ भी बहाया था, ‘मजदूर’ ‘दुनिया’ में ‘मशाल’ ले के खड़ा हुआ, ‘धर्म अधिकारी’ से जो ‘कर्मा’ बन आया था। ‘कानून अपना अपना ’ कहते हैं ‘इज्जतदार’, ‘सौदागर’ ने ही ‘किला’ ये बनाया था...।