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मुंबई से चलकर सातवें दिन पहुंचे लखनऊ... झारखंड जाएंगे, हर रोज 200 किमी साइकिल चलाते हैं ये मजदूर

Thu, 14 May 2020 04:15 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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मजदूर - फोटो : amar ujala
ये सच है जंग कोई भी हो, जीतता वही है जिसमें हौसला हो। जज्बा हो। अनुकूलन की क्षमता हो। इन तस्वीरों को देखिए। इनमें वो सबकुछ नजर आएगा। सैकड़ों मील की दूरी थी तो क्या? पास खाने को नहीं था तो क्या? पर, हौसला था। किसी ने ये दूरी पैदल ही नाप दी तो कोई साइकिल से निकल पड़ा। ये तस्वीर है मुंबई से झारखंड जा रहे 20 मजदूरों की। सबके पास नई साइकिलें हैं और सब एक सफर के साथी हैं। (सभी तस्वीरें- मोहम्मद इमरान।)
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- फोटो : amar ujala
लॉकडाउन में काम-धंधा रहा नहीं। आगे खाने के भी लाले होने लगे। ऐसे में घर जाने का फैसला किया। पेट काटकर जो जोड़ा था उससे साइकिल खरीदी। कुछ ने उधार भी लिया और 6 मई को झारखंड के लिए निकल पड़े। करीब 1400 किमी. का सफर पूरा कर बुधवार को ये टोली लखनऊ पहुंची।
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- फोटो : amar ujala
टोली में शामिल श्रमिकों ने बताया कि वे रोजाना करीब 200 किलोमीटर साइकिल चला रहे हैं। रास्ते में खाना पानी मिलता रहा और सफर चलता रहा तो ये साइकिल उन्हें घर भी पहुंचा देगी।

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- फोटो : amar ujala
चूल्हे ठंडे पडे़... तो निकले अपने गांव
चूल्हों की आग ठंडी हो गई है, सामान भरकर गठरियां तैयार हैं, पानी की बाल्टी खाली की...बस दरवाजे पर ताला लगना ही बाकी है...। बुधवार को ये नजारा था गोमतीनगर के बड़ा भरवारा इलाके में मजदूरों की बस्ती का।
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- फोटो : amar ujala
दो जून की रोटी के लाले पड़े तो हर कोई अपने गांव लौटने की तैयारी में है। कैसे जाएंगे? ये पूछने पर एक ही जवाब मिलता है कि साधन मिल गया तो अच्छी बात नहीं तो पैदल ही निकल लेंगे।
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मजदूर - फोटो : amar ujala
सराहनीय: पैरों में छाले देख बच्चों ने मजदूरों को बांटे जूते-चप्पल
मिलों का सफर, पैरों में छाले, हादसों और मौसम से लड़ते मजदूरों का रेला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, किसी के पैर में चप्पल है कोई नंगे पांव, स्कूली बच्चे लगातार ऐसी खबरों को अखबारों में देख रहे थे, लिहाजा गोमतीनगर अलमाइटी स्कूल के बच्चों ने अपने और अपने परिवार के जूते चप्पल मजदूरों को देने का फैसला किया।
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- फोटो : amar ujala
इस मुहिम में उन्होंने एक गाड़ी भर कर चप्पल इकट्ठा किया और शहीद पथ से आ रहे मजदूरों को चप्पल बांटे।
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