लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। लखनऊ में अपर पुलिस अधीक्षक नगर पूर्वी रहे शिवराम यादव को मातहतों से समान व्यवहार और क्षमता का आंकलन करके काम सौंपकर संगीन वारदातों के चंद घंटे में खुलासे के लिए याद किया जाता है।
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पीपीएस शिवराम यादव
- फोटो : अमर उजाला
सपा शासनकाल में ताबड़तोड़ वारदातों के दौर में शिवराम यादव की अपर पुलिस अधीक्षक नगर पूर्वी के पद पर तैनाती हुई। आए दिन कानून व्यवस्था का संकट था। पुलिसकर्मी काम के बोझ के साथ पक्षपात का रोना रो रहे थे। शिवराम यादव ने कार्यभार संभालने के साथ ही मातहतों की नब्ज पकड़ी। सहकर्मियों की चुगली करके अफसर के खास बने पुलिसकर्मियों से दूरी बनाने के साथ सभी के साथ समान व्यवहार शुरू किया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
पीड़ितों को दिलासा देते हुए सुनवाई के साथ कार्रवाई कराकर चंद दिनों में नागरिकों का विश्वास जीता और हर थाना क्षेत्र में खुद का नेटवर्क तैयार कर लिया। अपने कार्यालय के साथ क्षेत्र के दस थानों में तैनात निरीक्षक से लेकर आरक्षी तक की कार्यक्षमता का आंकलन करके ड्यूटी लेनी शुरू की।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
नाकारा समझे जा रहे पुलिसकर्मी भी अपनी क्षमता के मुताबिक काम से न सिर्फ सक्रिय हुए, बल्कि दूसरों से बेहतर साबित करने में जुट गए। पारा और बंथरा क्षेत्र में दो-दो लड़कियों की हत्या के चंद घंटे में खुलासा हुआ।
मुस्करा कर संभाली कानून व्यवस्था
विधानभवन और आसपास प्रदर्शन पर शिवराम यादव पहले पुलिस व पीएसी से घेराबंदी कराते और फिर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे लोगों से मुस्कराते हुए बातचीत शुरू करके उन्हें आश्वासन देते। मुख्यमंत्री से लेकर शासन के अफसरों तक से मुलाकात या फोन पर बात कराकर अनेक प्रदर्शन खत्म कराए।