प्रतीकात्मक तस्वीर
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खाकी के सम्मान के लिए मुख्यमंत्री से भी ले लिया मोर्चा
जुलाई 2007 में मायावती के शासनकाल में डीके राय और उनकी टीम चित्रकूट में कुख्यात दस्यु सरगना ठोकिया की तलाश कर रही थी तभी उसने पुलिस पार्टी को घेरकर हमला कर दिया। सात घंटे तक दोनों के बीच फायरिंग होती रही और डीके राय मदद के लिए आईजी से लेकर एसएसपी तक से संपर्क करते रहे। हालांकि, कोई मदद को नहीं आया और ठोकिया ने चार पुलिसकर्मियों को मार डाला। मुख्यमंत्री ने डीके राय को किसी अधिकारी को सूचना दिए बगैर ठोकिया की तलाश में जाने के आरोप में सस्पेंड कर दिया था। गलत आरोप लगाने पर डीके राय ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर कराने की कोशिश की। पुलिस के हाथ खड़े करने पर वह कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को उन्हें बहाल करने का आदेश देते हुए तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया था। आज भी वह मायावती समेत उस वक्त डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह समेत अन्य अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए पैरवी कर रहे हैं।