परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा में हर कदम पर लापरवाही बरती गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि परीक्षा से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन व अंक चढ़ाने तक में गंभीर चूक हुई। परीक्षा के लिए तैयार कराई गई बुकलेट पर रोल नंबर भरने के लिए 10 ब्लॉक बने थे, लेकिन अनुक्रमांक 11 अंकों का जारी कर दिया गया। यहीं से चूक की शुरुआत हो हई। परीक्षा से ऐन पहले गलती पकड़ में आई तो परीक्षा से जुड़े कार्य कंप्यूटराज्ड के बजाय मैनुअली कराने का फैसला किया गया।
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डेमो
- फोटो : डेमो
सूत्रों के अनुसार, सहायक अध्यापक भर्ती में हर स्तर पर अनियमितता और लापरवाही बरती गई। जांच रिपोर्ट में इनका उल्लेख किया गया है। परीक्षा कराने के लिए हर स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई थीं। आवेदन पत्र प्राप्त करने से लेकर अनुक्रमांक जारी करने तक का काम एक एजेंसी से कराया गया।
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exam shimla
परीक्षा का आयोजन, मूल्यांकन व अंकों को चढ़ाने का काम विभाग ने कराया। परिणाम तैयार किया किसी अन्य एजेंसी ने। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शिक्षकों से मैनुअली कराया गया। उन्होंने कॉपी जांचने से लेकर नंबर के योग और उन्हें चढ़ाने तक में गंभीर चूक की। रही-सही कसर कुछ बुकलेट का पार्ट-सी दूसरी कॉपियों में रखे जाने से पूरी हो गई।
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Teacher
परीक्षार्थियों के लिए जो बुकलेट तैयार कराई गई थी, उस पर रोल नंबर फीड करने के लिए 10 खाने (ब्लॉक) बनाए गए थे। बुकलेट का पहला पन्ना ए, बी और सी तीन हिस्सों में बंटा हुआ था। तीनों पर बारकोड अंकित थे। पार्ट सी पर रोल नंबर भरा जाना था और प्रश्नों के उत्तर भरने के लिए गोले बने हुए थे। बाद में इन्हीं गोलों के आधार पर मूल्यांकन किया जाना प्रस्तावित था। इसी को काटकर रिजल्ट तैयार कराने के लिए दिया जाना था।
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exam
परीक्षा से ठीक पहले यह चूक सामने आई कि अभ्यर्थियों को 10 के बजाय 11 अंकों के रोल नंबर जारी कर दिए गए हैं। इसे कंप्यूटर से रीड नहीं किया जा सकता था। नतीजतन पार्ट-सी पर गोलों को स्कैन करके मूल्यांकन का काम नहीं कराया जा सका। परीक्षा के सभी कार्य कंप्यूटराइज्ड के बजाय मैनुअली कराए गए।
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- फोटो : file
परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने जिन परीक्षकों से मूल्यांकन कराया, उनमें से कई ने गंभीर चूक की। 122 अंक वाले अभ्यर्थी को 22 अंक और 68 अंक वाले को 38 अंक दे दिए गए। ऐसे तमाम मामले पकड़ में आए हैं। कई परीक्षकों ने इस गंभीर मानवीय चूक के लिए गलती भी मानी है। मूल्यांकन ही नहीं, अंक चढ़ाने में भी गलतियां दोहराई गईं।
नहीं कराई रैंडम जांच
परीक्षा नियामक को एक कमेटी बनाकर मूल्यांकन की रैंडम जांच करानी थी। परीक्षा परिणाम घोषित करने से पहले यह काम भी नहीं कराया गया। यदि रैंडम जांच हुई होती तो अनियमितताएं पकड़ में आ सकती थीं। परीक्षा केंद्रों से कुछ परीक्षार्थियों की बुकलेट का पार्ट-सी फट जाने उसी दूसरी कॉपियां में डाल दिया गया। इससे एक परीक्षार्थी के अंक दूसरे के खाते में चले गए। एक दर्जन से ज्यादा ऐसे मामले पकड़ में आए हैं।